सारण। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (03-सारण) के आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। पूर्व सांसद आनंद मोहन द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज को समर्थन दिए जाने की घोषणा के बाद से ही सूबे की सियासत में भूचाल आ गया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है, बल्कि एनडीए के अंदरूनी समीकरणों और सामाजिक प्रतिनिधित्व के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर, शिक्षक मतदाताओं के बीच भी राहुल राज के पक्ष में तेजी से गोलबंदी होने की चर्चाएं आम हो गई हैं।

​राजपूत समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का ज्वलंत मुद्दा

​इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आनंद मोहन ने सारण क्षेत्र में राजपूत समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सुलगता सवाल पुरजोर तरीके से उठाया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आंकड़े रखते हुए बताया कि इस क्षेत्र में समाज के नौ विधायक, एक विधान पार्षद (एमएलसी) और तीन सांसद मौजूद हैं।
​इसके बावजूद उन्होंने तीखा सवाल किया कि इतनी भारी राजनीतिक भागीदारी और प्रभाव होने के बावजूद समाज के वास्तविक प्रतिनिधित्व की उपेक्षा कर फैसले क्यों लिए जा रहे हैं। उनके इस आक्रामक बयान को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में सामाजिक हकूमत, हिस्सेदारी और राजनीतिक उपेक्षा के बड़े नैरेटिव के तौर पर देखा जा रहा है।

​एनडीए की सीट-बंटवारे की रणनीति पर तीखे सवाल

​आनंद मोहन ने केवल सामाजिक प्रतिनिधित्व तक ही सीमित न रहते हुए, सीधे तौर पर एनडीए की सीट-बंटवारे की रणनीति और आंतरिक समन्वय पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि यदि विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव होना था और उनमें से एक-एक सीट क्रमशः जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान के खाते में चली जाती, तो भी पांच सुरक्षित सीटें शेष बचतीं।
​इन बाकी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) आपसी सहमति से निर्णय ले सकती थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसी कार्यशैली और एकतरफा फैसलों के बाद एनडीए की तथाकथित एकजुटता का आखिरकार क्या अर्थ बच जाता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि यही फैसले वशिष्ठ नारायण सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ललन सिंह या खुद उनके द्वारा लिए जाते, तो विरोधी दल और जनता उन पर सवाल उठाने में देर नहीं करती।

​राहुल राज को समर्थन और आनंद पुष्कर की उम्मीदवारी की चर्चा

​एक तरफ जहां आनंद मोहन ने निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज के समर्थन का खुलकर ऐलान कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर की उम्मीदवारी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रणधीर कुमार सिंह पार्टी के प्रति अपनी वफादारी और प्रतिबद्धता निभाते हुए जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर का समर्थन कर सकते हैं, हालांकि उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, आनंद पुष्कर के लगभग छह महीने पहले ही सीपीआई छोड़कर जदयू में शामिल होने के राजनीतिक पृष्ठभूमि का जिक्र भी इस चुनाव में खूब हो रहा है।