पंकज श्रीवास्तव, छपरा। बिहार विधान परिषद के अंतर्गत सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। निर्वाचन कार्यक्रम की विधिवत घोषणा के साथ ही संबंधित पांचों जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। यह प्रक्रिया चुनाव संपन्न होने तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस चुनाव को पूरी तरह स्वच्छ, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।
नामांकन और महत्वपूर्ण तिथियां
निर्वाचन आयोग के तय शेड्यूल के अनुसार, आगामी 29 सितंबर से नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी जो छह अक्टूबर तक चलेगी। अवकाश के दिनों को छोड़कर सभी कार्यदिवसों में सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। इसके लिए सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र-सह-आयुक्त के न्यायालय कक्ष को निर्धारित किया गया है। नामांकन के लिए वैध प्रत्याशी को अंतिम निर्वाचक सूची के 10 मतदाताओं को प्रस्तावक बनाना अनिवार्य होगा। इसके बाद सात अक्टूबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी और नौ अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।


शिक्षक मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग
इस निर्वाचन क्षेत्र के दायरे में आने वाले पांच जिलों में कुल 98 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें पश्चिमी चंपारण में 18, पूर्वी चंपारण में 27, गोपालगंज में 14, सिवान में 19 और सारण जिले में 20 मतदान केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों पर कुल 10,743 योग्य शिक्षक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 8,885 पुरुष और 1,858 महिला मतदाता शामिल हैं। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सारण जिले में सबसे अधिक 3,824 मतदाता हैं, जबकि सिवान में 2,183, पूर्वी चंपारण में 1,741, पश्चिमी चंपारण में 1,713 और गोपालगंज में 1,282 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान आगामी 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक संपन्न होगा।
प्रशासनिक तैयारियां और सिंगल विंडो सिस्टम
निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त सह निर्वाची पदाधिकारी मनीष कुमार ने सभी संबंधित पांचों जिलों के जिला पदाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है। मतदान वैध मतपत्रों के माध्यम से कराया जाएगा, जिसके लिए मतपेटिकाओं और मतदान दलों के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा, प्रचार-प्रसार की अनुमति के लिए जिला स्तर पर ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ बनाया गया है, जहां ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सभा, जुलूस और वाहनों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। शांतिपूर्ण मतदान के बाद 27 अक्टूबर को मतों की गणना की जाएगी और 31 अक्टूबर तक संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।


