अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम (रोहतास)। नगर निगम सासाराम के एक हालिया आदेश ने शहर में नई बहस छेड़ दी है। निगम प्रशासन ने नगर क्षेत्र में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या का सर्वे कराने की जिम्मेदारी अब स्कूली शिक्षकों को देने का फैसला किया है। इसके लिए सभी विद्यालय प्राचार्यों को पत्र जारी कर एक-एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नामित करने का निर्देश दिया गया है।

शिक्षक बनेंगे नोडल अधिकारी

जारी पत्र के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय से चयनित शिक्षक अपने स्कूल के आसपास के क्षेत्र में घूमने वाले आवारा कुत्तों की गिनती करेंगे और संबंधित आंकड़े नगर निगम को उपलब्ध कराएंगे। कहा गया है कि जुटाए गए डेटा के आधार पर आगे की कार्रवाई और नियंत्रण की रणनीति तैयार की जाएगी।

प्रशासन का तर्क – बढ़ती समस्या पर नियंत्रण

नगर आयुक्त विकास कुमार ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और काटने की घटनाओं पर निगरानी के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत सटीक जानकारी जुटाना जरूरी है, और विद्यालय स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने से क्षेत्रवार वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

शिक्षकों में नाराजगी, आदेश पर उठे सवाल

इस आदेश के बाद शिक्षकों में गहरा विरोध देखने को मिला है। उनका कहना है कि शिक्षकों का काम पठन-पाठन है, न कि सड़कों पर कुत्तों की गिनती करना। कई शिक्षकों ने इसे गरिमा के खिलाफ और अवांछित जिम्मेदारी करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस आदेश पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, और मामला चर्चा का विषय बन गया है।