अनमोल मिश्रा, चित्रकूट/सतना। धर्मनगरी चित्रकूट के लिए 27 मार्च का दिन किसी उत्सव से कम नहीं था। रामनवमी के पावन अवसर पर चित्रकूट का ‘गौरव दिवस’ मनाया जाना था, जिसके लिए पूरे नगर को एक दुल्हन की तरह सजाया गया था। लेकिन शाम ढलते ही मौसम के बदले मिजाज और अचानक हुई तेज बारिश ने प्रशासन की तैयारियों और श्रद्धालुओं के उत्साह पर पानी फेर दिया।
21 लाख दीपों से सजना था रामघाट
तैयारियां अपने अंतिम दौर में थीं। लक्ष्य था मां मंदाकिनी के तटों को 21 लाख से अधिक दीपों की रोशनी से सराबोर करना। पवित्र भरत घाट पर भव्य गंगा आरती और श्री राम प्राकट्य पर्व की गूंज सुनाई देने वाली थी। चित्रकूट की सड़कों को चकाचक साफ कर बिजल सजाया गया था। प्रमुख मंदिरों में की गई आकर्षक सजावट भक्तों का मन मोह रही थी। घाटों की सीढ़ियों पर कतारबद्ध तरीके से दीये सजा दिए गए थे और उनमें तेल भी डाल दिया गया था।
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दौरा निरस्त और मौसम का बदला रुख
जैसे-जैसे शाम नजदीक आई, दो बड़ी बाधाएं सामने खड़ी हो गईं। पहले आधिकारिक सूचना मिली कि मुख्यमंत्री का चित्रकूट दौरा अपरिहार्य कारणों से निरस्त कर दिया गया है। इस खबर से प्रशासनिक हलकों में मायूसी छाई ही थी कि अचानक आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल लिया। देखते ही देखते ठंडी हवाएं चलने लगीं और पहले बूंदाबांदी, फिर बारिश शुरू हो गई।
पानी में बहा ‘तेल’ और श्रद्धालुओं की मेहनत
यह बारिश उत्सव के लिए काल बन गई। सड़कों के किनारे और घाटों पर सजाए गए लाखों दीयों में डाला गया तेल पानी के साथ मिलकर बर्बाद हो गया। तेल और पानी के मिश्रण की वजह से दीयों की बाती को जलाना नामुमकिन सा हो गया।
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श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों ने हार नहीं मानी। तेज बारिश के बीच भी लोग दीयों को बचाने की कोशिश करते दिखे, लेकिन कुदरत के आगे सब बेबस थे। जो गिने-चुने दीये जल पाए, उनके लिए प्रशासन और स्थानीय लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
अधूरा रहा विश्व रिकॉर्ड का सपना
जिस चित्रकूट को दीपावली जैसा स्वरूप देने की तैयारी थी, वहां बारिश के बाद अंधेरा और कीचड़ पसर गया। हालांकि, राम भक्तों का कहना है कि यह प्रभु की लीला है, लेकिन महीनों की मेहनत और लाखों रुपयों का तेल पानी में बह जाने से हर कोई आहत दिखा। गौरव दिवस की वह भव्यता, जिसकी कल्पना की गई थी, बारिश की बूंदों में कहीं खो गई।
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