Lalluram Business Desk. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (ASTPL) और इसके संस्थापक अवधूत साठे को निवेशकों और प्रतिभागियों से जुटाई गई 546.17 करोड़ रुपये की राशि वापस करने का आदेश दिया है। यह राशि बिना रजिस्ट्रेशन के इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी और रिसर्च एनालिस्ट गतिविधियों के जरिए जुटाई गई थी। मार्केट रेगुलेटर ने उन्हें 67.87 करोड़ रुपये का ब्याज भी अपने ‘इन्वेस्टर प्रोटेक्शन एंड एजुकेशन फंड’ (IPEF) में जमा करने का निर्देश दिया है।

शुक्रवार को जारी एक अंतिम आदेश में, सेबी ने एकेडमी और अवधूत साठे को दो साल के लिए, या जब तक वे रिफंड के निर्देश का पालन नहीं कर लेते (जो भी बाद में हो), तब तक सिक्योरिटी मार्केट में काम करने से रोक दिया है। एकेडमी की डायरेक्टर, गौरी अवधूत साठे को भी छह महीने के लिए मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

सेबी ने एकेडमी, अवधूत साठे और गौरी साठे पर कुल 11.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें एकेडमी पर 6 करोड़ रुपये, अवधूत साठे पर 4 करोड़ रुपये और गौरी साठे पर 1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना शामिल है। यह जुर्माना आदेश मिलने के 45 दिनों के भीतर चुकाना होगा।

एकेडमी और इसके संस्थापक को आदेश मिलने के पांच महीने के भीतर 546.17 करोड़ रुपये एक विशेष बैंक खाते में जमा करने होंगे, जहां से रिफंड किया जाएगा। उन्हें आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर अंग्रेजी और हिंदी के राष्ट्रीय समाचार पत्रों के साथ-साथ स्थानीय भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में नोटिस भी प्रकाशित करना होगा। इस नोटिस में यह बताना होगा कि पात्र निवेशक और प्रतिभागी अपना रिफंड कैसे क्लेम कर सकते हैं।

रिफंड प्रक्रिया के बाद बची हुई कोई भी राशि सेबी के पास जमा करनी होगी। इसे एक एस्क्रो अकाउंट में एक साल तक रखा जाएगा, ताकि उन ग्राहकों, शिकायतकर्ताओं और निवेशकों को बांटा जा सके जिन्होंने एडवाइजरी या रिसर्च सेवाओं का लाभ लिया था। इस अवधि के बाद भी बची हुई कोई भी राशि IPEF में ट्रांसफर कर दी जाएगी। यह भी पढ़ें: SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट्स को इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स की कॉल रिकॉर्डिंग करने की अनिवार्यता से छूट दी

SEBI ने एकेडमी और उसके फाउंडर के बैंक अकाउंट्स को तब तक के लिए फ्रीज कर दिया है, जब तक कि जरूरी रकम जमा नहीं हो जाती। उन्हें अपनी संपत्ति (जैसे शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश) बेचने से भी रोक दिया गया है, सिवाय उस स्थिति के जब उन्हें रिफंड के निर्देशों का पालन करना हो।

रेगुलेटर ने तीनों नोटिस पाने वालों को निर्देश दिया है कि वे बिना रजिस्ट्रेशन के इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी और रिसर्च एनालिस्ट सेवाएं देना बंद करें। उन्हें ऐसे लाइव या पुराने डेटा का इस्तेमाल करने से भी मना किया गया है, जो भविष्य में किसी खास सिक्योरिटी (शेयर आदि) की चाल के बारे में संकेत देते हों।

यह आदेश 1 जुलाई 2017 से 9 अक्टूबर 2025 तक की अवधि की जांच के बाद आया है। SEBI का आरोप है कि एकेडमी और उसके फाउंडर ने केवल स्टॉक मार्केट की शिक्षा देने के बजाय, बिना जरूरी रजिस्ट्रेशन के स्टॉक से जुड़ी सलाह, ट्रेडिंग कॉल, एंट्री और एग्जिट टारगेट, स्टॉप-लॉस लेवल और कीमतों की दिशा के बारे में अनुमान दिए। SEBI ने पिछले साल अगस्त में कर्जत स्थित एकेडमी पर छापा भी मारा था।

रेगुलेटर ने यह भी कहा कि एकेडमी के प्रचार-प्रसार वाली सामग्री में केवल मुनाफे वाले ट्रेड दिखाए गए और यह दावा किया गया कि इसमें शामिल होने वालों को बहुत ज्यादा रिटर्न मिलेगा। SEBI ने गौर किया कि मार्च 2024 में गुमराह करने वाली जानकारी देने और परफॉरमेंस को चुनिंदा तरीके से पेश करने के लिए दी गई प्रशासनिक चेतावनी के बावजूद, उनका यह काम जारी रहा।

एकेडमी और उसके फाउंडर ने दलील दी कि उनके प्रोग्राम केवल शिक्षा देने के लिए थे, प्रतिभागी अपने ट्रेडिंग फैसले खुद लेते थे, और उनसे ली गई फीस निवेश की सलाह के लिए नहीं, बल्कि कोर्स के लिए थी। SEBI ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और रिफंड की जाने वाली रकम 546.17 करोड़ रुपये तय की।

SEBI ने कहा कि ASTPL का बिजनेस मॉडल रेगुलेटरी उद्देश्यों को कमजोर करता है। अपने आदेश में, SEBI के अर्ध-न्यायिक अधिकारी एन. मुरुगन ने कहा, “पढ़ाई के दौरान दी गई कोई भी सलाह निवेश के फैसले को प्रभावित कर सकती है। अगर सलाह पाने वाले को ‘छात्र’ कहा जाए, तो भी उस सलाह पर अमल करने का जोखिम कम नहीं हो जाता।”

मुरुगन ने आगे कहा कि प्रतिभागी इन सलाहों पर ज्यादा भरोसा कर सकते हैं, क्योंकि ये उन्हें पढ़ाने वाले और उनकी समझ को सही ठहराने वाले व्यक्ति की तरफ से आ रही थीं। उन्होंने कहा, “सफल ट्रेड दिखाना या आगे के कोर्स का प्रचार करना, किसी तरीके (method) में भरोसा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन का काम कर सकता है। इससे स्वतंत्रता, हितों के टकराव (conflicts of interest) और अन्य गतिविधियों से दूरी बनाए रखने (arm’s-length relationship) से जुड़े रेगुलेटरी नियम और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। किसी मेंटर पर भरोसा इन कंट्रोल (नियंत्रणों) की जगह नहीं ले सकता।”

इस आदेश में गौरी साठे की जिम्मेदारी पर अलग से बात की गई है। सेबी (SEBI) ने कहा कि उनकी जवाबदेही एक डायरेक्टर के तौर पर अपनी निगरानी की जिम्मेदारियों में लापरवाही बरतने की वजह से है। ऐसा कहीं नहीं पाया गया कि उन्होंने खुद विवादित सेवाएं दी हों, कोई व्यवस्था बनाई हो, या इससे कोई गलत फायदा उठाया हो।

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