आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। जगदलपुर के ऐतिहासिक सीरासार भवन में बस्तर दशहरा की दूसरी महत्वपूर्ण रस्म ‘डेरी गड़ाई’ विधि-विधान और श्रद्धा भाव के साथ संपन्न हुई। सदियों पुरानी इस परंपरा में बिरिंगपाल से लाई गई सरई की पवित्र टहनियों की पूजा कर उनकी स्थापना की गई।

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मान्यता है कि डेरी गड़ाई की रस्म के साथ ही बस्तर दशहरा के भव्य रथ निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति मिलती है। यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि बस्तर की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण विधान है। इस मौके पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर आकाश छिकारा समेत जनप्रतिनिधि, सामाजिक प्रमुख, मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

सांसद महेश कश्यप ने कहा कि आने वाले सभी विधानों को इसी तरह पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूरा किया जाएगा और इस वर्ष बस्तर दशहरा को भव्य रूप देने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में बदले हालात के बीच देश-दुनिया से पर्यटकों के आने की उम्मीद है और बस्तर की गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

वहीं कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दशहरा पूरे गरिमामय तरीके से मनाया जा रहा है और आगे की सभी रस्में परंपरा के अनुसार संपन्न होंगी। अब आने वाले दिनों में काछनगादी और जोगी बिठाई जैसी महत्वपूर्ण रस्में होंगी, जिसके बाद बस्तर दशहरा अपने अगले चरण में प्रवेश करेगा।

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