हेमंत शर्मा, इंदौर। राजनीति में कई बार छोटी-सी मुलाकात भी चर्चा का विषय बन जाती है। इंदौर की रेसिडेंसी कोठी पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे कम्युनिस्ट पार्टी के कार्ड होल्डर और इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। राजेश शर्मा अपने साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखा दुपट्टा लेकर पहुंचे थे। दुपट्टे पर लिखे इस धार्मिक संदेश को देखकर दिग्विजय सिंह ने ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसकी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।

ॐ नमः शिवाय’ से कामरेड का क्या लेना-देना?

मुलाकात के दौरान दिग्विजय सिंह ने राजेश शर्मा के दुपट्टे पर लिखे संदेश के बारे में पूछा। राजेश शर्मा ने बताया कि उस पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखा है। इस पर दिग्विजय सिंह ने सवाल किया—“इससे कामरेड पार्टी का क्या लेना-देना?”इस छोटे-से संवाद ने राजनीतिक पहचान और धार्मिक प्रतीकों को लेकर चर्चा का मौका दे दिया। एक तरफ कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े राजेश शर्मा, दूसरी तरफ उनके दुपट्टे पर भगवान शिव का मंत्र—इसी मेल ने इस बातचीत को सुर्खियों में ला दिया।

कम्युनिस्ट पहचान, शिव मंत्र और सियासी चर्चा

राजेश शर्मा कम्युनिस्ट पार्टी के कार्ड होल्डर रह चुके हैं और इंदौर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में उनके दुपट्टे पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखा होना और उस पर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई।हालांकि, इस संवाद को किसी राजनीतिक विवाद या वैचारिक टकराव का रूप देना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने सवाल किया था, लेकिन इस टिप्पणी के पीछे उनका क्या आशय था, यह स्पष्ट नहीं है।

एक सवाल, कई चर्चा

इंदौर की इस मुलाकात ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा कि क्या राजनीतिक विचारधारा और धार्मिक आस्था को हमेशा एक ही नजरिये से देखा जाना चाहिए? राजेश शर्मा के दुपट्टे पर लिखे मंत्र को लेकर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी ने लोगों को इस पहलू पर चर्चा करने का मौका दिया है। फिलहाल, रेसिडेंसी कोठी की यह मुलाकात किसी बड़े राजनीतिक फैसले से ज्यादा अपने एक छोटे, लेकिन दिलचस्प संवाद के कारण चर्चा में है।

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