दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। जनजातीय कार्य विभाग में प्रभारी सहायक संचालक आशा मौर्य ने अपने ही वरिष्ठों पर सनसनीखेज आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है। मैडम ने सहायक आयुक्त विवेक नागवंशी, बीईओ हर्षित कौरव और कर्मचारी मनोज सोनी पर ब्लैकमेलिंग, उगाही और जेल भिजवाने के गंभीर आरोप जड़े हैं। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के पीछे की कहानी अब बेहद चौंकाने वाली सामने आ रही है।
निलंबन और स्टे का खेल
आशा मौर्य के मुताबिक जब उन्होंने इन हरकतों की शिकायत बड़े अफसरों से की, तो बदले की कार्रवाई करते हुए उनका निलंबन करवा दिया गया। लेकिन मैडम भी चुप बैठने वालों में से नहीं थीं वे सीधे हाईकोर्ट पहुंच गईं, जहां से उन्हें निलंबन पर स्थगन (स्टे) मिल गया। मैडम का दावा है कि प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने पुलिस कप्तान तक गुहार लगाई और अजाक थाने में बयान दर्ज कराए।
घोटाले से बचने का पैंतरा
दूसरी तरफ आरोपी सहायक आयुक्त विवेक नागवंशी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे मैडम की सोची-समझी चाल बताया है। नागवंशी का सनसनीखेज दावा है कि असली खेल तो वित्तीय फर्जीवाड़े का है। मैडम के खिलाफ 4 लाख नहीं, बल्कि पूरे 20 लाख रुपये का लीव इनकैशमेंट (अवकाश नकदीकरण) अवैध रूप से भुगताने का बड़ा घोटाला पकड़ा गया है। विभागीय जांच की आंच जब तेज हुई, तो खुद को बचाने और मामले का रुख मोड़ने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा गया है।
किसकी खुलेगी पोल?
अजाक थाना प्रभारी आर.के. दुबे के मुताबिक, शिकायतकर्ता के बयान दर्ज हो चुके हैं और जल्द ही अन्य अफसरों के भी बयान लिए जाएंगे। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि यह मामला वाकई प्रताड़ना का है या फिर 20 लाख के इस बड़े फर्जीवाड़े पर पर्दा डालने का एक बेताब दांव! सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही बेनकाब होगी।
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