अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में आदिवासियों के कल्याण और बच्चों की शिक्षा-सुविधाओं को लेकर सरकार के दावों की जमीनी हकीकत तब सामने आ गई, जब कलेक्टर ने खुद औचक निरीक्षण किया। जिले के गोहपारू जनपद पंचायत अंतर्गत बरेली में संचालित 50 सीटर आदिवासी जूनियर बालक छात्रावास के निरीक्षण के दौरान जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। यहां बच्चों का सालभर से मेडिकल चेकअप ही नहीं कराया गया था, जिस पर कड़ा एक्शन लेते हुए कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने छात्रावास अधीक्षक को निलंबित कर दिया है।

सालभर से नहीं हुआ मेडिकल चेकअप 

निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर ने छात्रावास में बच्चों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। नियमों के तहत हर साल अनिवार्य रूप से कराया जाने वाला बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण यहां लंबे समय से नहीं हुआ था। इसके अलावा छात्रावास परिसर में पर्याप्त रोशनी (प्रकाश व्यवस्था) तक नहीं पाई गई। इन गंभीर लापरवाहियों को देखकर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताई।

रंगाई-पुताई और किचन की सफाई के निर्देश 

कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने निरीक्षण के दौरान सिर्फ कमियां ही नहीं गिनाईं, बल्कि व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए सख्त निर्देश भी दिए:

  • छात्रावास में तत्काल समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
  • किचन कक्ष की साफ-सफाई बेहतर करने और पूरे छात्रावास की रंगाई-पुताई कराने को कहा गया ताकि बच्चों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
  • बच्चों के आने-जाने का विवरण रजिस्टर में दर्ज करने और मिलने आने वाले अभिभावकों के पहचान पत्र (ID) अनिवार्य रूप से रखने के निर्देश दिए गए।
  • इसके अलावा, परिसर में खाली पड़ी जमीन का सदुपयोग करने के लिए वहां हल्दी और मौसमी सब्जियों का उत्पादन करने का अनूठा सुझाव भी दिया।

अधीक्षक पर गिरी गाज 

बच्चों की सेहत और मूलभूत सुविधाओं के साथ इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने छात्रावास अधीक्षक रामदयाल प्रजापति को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के अन्य शैक्षणिक और आवासीय परिसरों में भी हड़कंप मच गया है।

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