Dharm Desk :- शारदीय नवरात्रि के अवसर पर देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ गई है। महाराष्ट्र के अकोला में स्थित प्राचीन अंबिका माता मंदिर भी इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां भक्त मां के दर्शन करने और अपनी मनोकामनाओं की प्रार्थना करने पहुंच रहे है, इस मंदिर की खासियत केवल इसकी प्राचीनता तक सीमित नहीं है, बल्कि देवी के अलग-अलग नाम भी इसकी पहचान से जुड़े है। स्थानीय लोग मां को अंबिका देवी, बागातली देवी और रिजर्व माता के नाम से जानते हैं। वहीं, मंदिर से जुड़ी जानकारी में देवी के मरिमाता स्वरूप का भी उल्लेख मिलता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अंबिका माता को मरिमाता क्यों कहा जाता है और इस नाम के पीछे क्या मान्यता है?
लोकदेवी के रूप में पूजा होती रही है
अकोला के इस मंदिर में मां अंबिका की पूजा लंबे समय से होती आ रही है। मंदिर से संबंधित विवरणों के अनुसार, देवी को मरि माता के रूप में भी जाना जाता है। मरिमाता को स्थानीय परंपरा में एक प्राचीन लोकदेवी के रूप में देखा जाता है। समय के साथ देवी के अलग-अलग स्वरूपों और नामों को लेकर पूरे इलाके में धार्मिक आस्था विकसित हुईं। इसी वजह से एक ही देवी को अलग-अलग नामों से पुकारने की परंपरा दिखाई देती है। हालांकि, मरिमाता नाम कब और किस घटना के बाद प्रचलन में आया, इसकी स्पष्ट ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
बागातली देवी नाम के पीछे क्या है कहानी
मंदिर के नाम से जुड़ी एक स्थानीय मान्यता भी काफी प्रचलित है बताया जाता है कि पहले मंदिर के आस-पास फूलों का बगीचा हुआ करता था और उसी क्षेत्र में देवी की प्रतिमा स्थापित थी। बगीचे से संबंध होने के कारण मां को बागातली देवी कहा जाने लगा। सयम बीतने के साथ यह स्थान धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया। आज भी मंदिर के अलग-अलग नामों के पीछे जुड़ी इन कहानियों को स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ याद करते हैं।
इसलिए पड़ा रिजर्व माता नाम
इस मंदिर की सबसे चर्चित कहानी ब्रिटिश शासन काल से जुड़ी है। वर्ष 1853 में अंग्रेजों ने मंदिर की जगह पुलिस थाना बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए स्थान को सुरक्षित करने की कोशिश भी की गई, लेकिन वहां थाना नहीं बन पाय। बताया जाता है कि अंग्रेजों ने कई बार प्रयास किए, मगर हर बार उनकी योजना पूरी नहीं हो सकी। स्थानीय लोग इसे मां अंबिका की कृपा से जोड़कर देखते हैं। इसी घटना के बाद देवी को रिजर्व माता कहा जाने लगा। हालांकि, इस कहानी की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है।

नवरात्रि में विशेष पूजा और दर्शन
नवरात्रि के समय देवी के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालु पहुंच रहे है। भक्त नारियल, फूल, हल्दी, धूप, दीप और चुनरी अर्पित कर मां की पूजा करते हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है और देवी के श्रृंगार के दर्शन के लिए भी भक्त उत्सुक रहते है । स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूसरे क्षेत्रों से आने वाले लोग भी यहां माथा टेकते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां के दरबार में प्रार्थना करने से मन को शांति मिलती है और कठिन समय में संबल मिलता है।

