हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी अपने दबदबे और सादगी भरे अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन एक बार फिर चर्चा में हैं। इंदौर की रेसिडेंसी कोठी में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद मीडिया ने जब उनसे पूछा कि वे मुख्यमंत्री से मिली है, तो ताई ने मजाकिया अंदाज में कहा— “हां, नौकरी मांगने आई थी।”
मुख्यमंत्री से इस मुलाकात का मकसद क्या
ताई का यह जवाब भले ही हंसी-मजाक के अंदाज में दिया गया हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहा है कि आठ बार लोकसभा चुनाव जीतने और लोकसभा अध्यक्ष जैसे अहम पद पर रहने वाली सुमित्रा महाजन की मुख्यमंत्री से इस मुलाकात का मकसद क्या था? हालांकि, ताई ने अपने इस मजाकिया जवाब के जरिए किसी राजनीतिक नियुक्ति या पद की मांग की पुष्टि नहीं की।
अब मुलाकात पर चर्चा क्यों?
सुमित्रा महाजन इंदौर से लगातार आठ बार लोकसभा सांसद चुनी गईं और बाद में लोकसभा अध्यक्ष बनीं। उनका राजनीतिक सफर भाजपा और इंदौर की राजनीति में खास महत्व रखता है। लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं मिली—इसी पृष्ठभूमि में “नौकरी मांगने” वाला मजाक चर्चा का विषय बन गया।हालांकि, इस टिप्पणी को किसी पद की मांग या पार्टी में नाराजगी का संकेत मानना फिलहाल अटकल ही होगा। ताई ने सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई दावा नहीं किया है। इसलिए इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन उसके वास्तविक उद्देश्य की पुष्टि नहीं हुई है।
पानी की पाइपलाइन पर ताई की चिंता
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान चर्चा का एक अहम मुद्दा इंदौर का जल संकट भी रहा। सुमित्रा महाजन ने डैमेज पाइपलाइनों और नर्मदा की लाइनों में होने वाले लीकेज को लेकर चिंता जताई। उनका सुझाव था कि शहर की पाइपलाइनों का डिजिटल मैप तैयार किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट रहे कि कौन-सी लाइन कहां से गुजर रही है और जरूरत पड़ने पर लीकेज का स्थान आसानी से पता लगाया जा सके।
ताई के मुताबिक, यह सुझाव पहले भी दिया गया था और इस पर अमल होना चाहिए। उनका कहना है कि कहीं-कहीं नर्मदा की लाइन फूटने से पानी की सप्लाई प्रभावित होती है और आने वाले समय में जल संकट बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।ताई की यह चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब हाल में इंदौर में नर्मदा पाइपलाइन में लीकेज के कारण जलापूर्ति प्रभावित होने की खबरें आई हैं।
ताई के मजाक से लेकर पानी के मुद्दे तक—अब जवाब किसका?
सुमित्रा महाजन के “नौकरी मांगने आई थी” वाले मजाक ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है, लेकिन उनकी मुलाकात का वास्तविक उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, पाइपलाइन के डिजिटल मैप और जल संकट पर उनकी टिप्पणी ने शहर की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा सवाल फिर सामने ला दिया है। अब सवाल यह है कि इंदौर में बार-बार सामने आने वाले पाइपलाइन लीकेज और जल संकट से निपटने के लिए डिजिटल मैपिंग के सुझाव सुमित्रा महाजन की तरफ से दिए गए थे हालांकि उसे पर अमल हुआ या नहीं हुआ है इस पर भी सवाल खड़े होते हैं।
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