अमित पांडेय, सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में प्रशासनिक अमले की लापरवाही और सुस्ती के चलते अब न्यायपालिका को खुद सड़कों पर उतरना पड़ा है। शहर के प्रमुख न्यू बस स्टैंड के सामने अचानक हुई मजिस्ट्रेट चेकिंग से स्कूल बस संचालकों में हड़कंप मच गया। खुद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद वर्मा एवं रजिस्ट्रार सोनू जैन ने दोपहर 2 बजे मौके पर उतरकर वाहनों की सघन जांच की।
नियमों की धज्जियां, ओवरलोडिंग और बिना कागज के दौड़ रहीं बसें
चेकिंग के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए तय मानकों की भारी अनदेखी उजागर हुई। कई बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था। जांच में पाया गया कि अधिकांश वाहनों में फायर सेफ्टी, स्पीड गवर्नर, चालक की यूनिफॉर्म और अनिवार्य दस्तावेज गायब थे।

2 स्कूल बसें और प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस का वाहन जब्त
कार्रवाई के दौरान नियमों का उल्लंघन करने पर 2 स्कूल बसों और प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के एक वाहन समेत कुल 4 वाहनों को जब्त कर लिया गया। यातायात पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर 9,000 रुपये का ऑनलाइन चालान किया है। मौके पर मौजूद यातायात प्रभारी ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ रोकने के लिए यह चेकिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

बड़ा सवाल: आखिर क्या कर रहा था जिम्मेदार अमला?
मजिस्ट्रेट की इस चेकिंग के बाद अब स्थानीय परिवहन और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर महज एक मजिस्ट्रेटियल चेकिंग में इतनी बड़ी अनियमितताएं और लापरवाहियां सामने आ सकती हैं, तो नियमित जांच के नाम पर जिम्मेदार अमला और RTO विभाग आखिर क्या कर रहा था?

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