किशनगंज। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया सीमांचल दौरे ने भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव की बहस छेड़ दी है। अररिया के सिकटी से शाह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हर अवैध अतिक्रमण और घुसपैठिए पर कड़ा एक्शन होगा।

​चिकन नेक की संवेदनशीलता और ग्राउंड रिपोर्ट

​किशनगंज जिला सामरिक रूप से भारत का सबसे संवेदनशील ‘चिकन नेक’ हिस्सा है। बांग्लादेश बॉर्डर के काकरोदा और पंडित बस्ती जैसे इलाकों में आबादी अंतरराष्ट्रीय सीमा के महज 200 मीटर के दायरे में बसी है। वहीं, नेपाल बॉर्डर पर खुली सीमा और बिना फेंसिंग के घर सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन अब होली के बाद इन अवैध निर्माणों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

​डेमोग्राफी और दस्तावेजों का जाल

​पिछले 15 वर्षों में सीमावर्ती गांवों में आबादी का ‘अदृश्य विस्तार’ हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कई निवासियों के पास जमीन के वैध दस्तावेज नहीं हैं। केंद्र सरकार अब एक उच्च स्तरीय समिति के जरिए फर्जी आधार कार्ड और नागरिकता दस्तावेजों की सघन जांच कराएगी। इसका उद्देश्य सीमावर्ती जिलों के बदलते भूगोल और संस्कृति को संरक्षित करना है।

​वाइब्रेंट विलेज: सुरक्षा का नया कवच

​सरकार केवल सख्ती ही नहीं, बल्कि ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के जरिए इन गांवों का कायाकल्प भी करना चाहती है। बुनियादी ढांचा, बेहतर नेटवर्क और बिजली की पहुंच से पलायन रुकेगा, जिससे सीमा सुरक्षा और मजबूत होगी।