Business Desk : छोटी बचत से भी बड़ा फंड बनाया जा सकता है। हर महीने 3,000 रुपए की SIP करने पर 15 साल में 15 लाख रुपए से ज्यादा का फंड बन सकता है। हालांकि, इसके लिए निवेश में नियमितता और धैर्य जरूरी है।

कई लोग कम कमाई के चलते निवेश शुरू नहीं कर पाते। उन्हें लगता है कि बड़ा फंड बनाने के लिए हर महीने मोटी रकम बचाना जरूरी है। लेकिन ऐसा नहीं है। आप रोजाना 100 रुपए बचाकर भी म्यूचुअल फंड SIP के जरिए लंबी अवधि में अच्छा फंड बना सकते हैं।

इसके लिए आपको रोज के 100 रुपए यानी महीने के करीब 3,000 रुपए निवेश करने होंगे। अगर इस निवेश पर सालाना औसतन 12% रिटर्न मिलता है, तो अलग-अलग समय में आपका फंड कितना हो सकता है, इसे समझते हैं।

रोज 100 रुपए बचाकर 5 साल में कितना फंड बनेगा?

अगर आप हर महीने 3,000 रुपए की SIP करते हैं और इसे 5 साल तक जारी रखते हैं, तो 12% सालाना अनुमानित रिटर्न के हिसाब से आपका फंड करीब 2.47 लाख रुपए हो सकता है।

हर महीने निवेश: 3,000 रुपए
निवेश की अवधि: 5 साल
अनुमानित सालाना रिटर्न: 12%
कुल निवेश: 1.80 लाख रुपए
अनुमानित रिटर्न: 67,459 रुपए
कुल फंड: करीब 2.47 लाख रुपए

10 साल में 7 लाख रुपए के करीब फंड
अगर आप इसी निवेश को 10 साल तक जारी रखते हैं, तो आपका कुल निवेश 3.60 लाख रुपए होगा। 12% सालाना अनुमानित रिटर्न के हिसाब से यह रकम बढ़कर करीब 6.97 लाख रुपए हो सकती है।

हर महीने निवेश: 3,000 रुपए
निवेश की अवधि: 10 साल
अनुमानित सालाना रिटर्न: 12%
कुल निवेश: 3.60 लाख रुपए
अनुमानित रिटर्न: 3.37 लाख रुपए
कुल फंड: करीब 6.97 लाख रुपए

15 साल में 15 लाख रुपए से ज्यादा का फंड
इस निवेश को अगर आप 15 साल तक जारी रखते हैं, तो आपका कुल निवेश 5.40 लाख रुपए होगा। 12% सालाना अनुमानित रिटर्न मिलने पर फंड बढ़कर करीब 15.13 लाख रुपए हो सकता है।

हर महीने निवेश: 3,000 रुपए
निवेश की अवधि: 15 साल
अनुमानित सालाना रिटर्न: 12%
कुल निवेश: 5.40 लाख रुपए
अनुमानित रिटर्न: 9.73 लाख रुपए
कुल फंड: करीब 15.13 लाख रुपए

SIP में कंपाउंडिंग का मिलता है फायदा

लंबे समय तक निवेश करने का एक बड़ा फायदा कंपाउंडिंग है। आसान भाषा में समझें तो इसमें आपको सिर्फ अपनी जमा रकम पर ही नहीं, बल्कि पहले मिले रिटर्न पर भी आगे रिटर्न मिलता है।

इसी वजह से शुरुआत में निवेश और रिटर्न का अंतर कम दिखाई देता है, लेकिन समय बढ़ने के साथ यह अंतर बड़ा होता जाता है। इसलिए निवेश में सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप हर महीने कितनी रकम लगा रहे हैं, बल्कि यह भी जरूरी है कि कितने लंबे समय तक निवेश जारी रखते हैं।