अजय सैनी, भिवानी. दर्द की कोई भाषा नहीं होती, न ही आंसुओं का कोई धर्म या जाति होती है। जब एक इंसान पर अत्याचार होता है तो उसकी चीखें अदालतों और पुलिस थानों तक पहुंच जाती हैं, लेकिन जब कोई बेजुबान जानवर दरिंदगी का शिकार होता है तो उसकी पीड़ा सिर्फ उसकी खामोश आंखों में आंसुओं बनकर बहती है। कस्बा सिवानी में एक बेजुबान गधे के साथ हुई हैवानियत और फिर पुलिस की कथित अनदेखी के कारण उसकी हुई दर्दनाक मौत ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।
डंडों से पीट-पीटकर उसकी टांग तोड़ दी गई, सिर फोड़ दिया गया और वह बेजुबान तड़प-तड़पकर दम तोड़ गया। उस निष्पाप जीव को न्याय दिलाने और दोषी पुलिसकर्मियों व आरोपी पर कार्रवाई की मांग को लेकर गौरक्षा दल भिवानी वीरवार से स्थानीय लघु सचिवालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है।
मामले की गंभीरता और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए गौरक्षा दल भिवानी के प्रधान संजय परमार ने कहा कि क्या इस दुनिया में एक बेजुबान गधे को जीने का अधिकार नहीं है। परमार ने बताया कि उनके द्वारा 27 सितंबर को ही इस क्रुरता के खिलाफ सिवानी थाना में शिकायत दी गई थी। लेकिन जांच अधिकारी एएसआई कुलदीप ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद दो दिनों तक वे एसएचओ इंस्पेक्टर रिसाल सिंह के सामने गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्होंने भी इस गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब उनके द्वारा डीएसपी सिवानी से प्रार्थना की। इसके बाद जाकर 30 सितंबर को पुलिस ने बेजुबान का मेडिकल करवाया और आरोपी को ही इलाज कराने के लिए बाध्य किया। जो कार्रवाई 27 तारीख को ही हो जानी चाहिए थी, उसमें पुलिस ने जानबूझकर ढिलाई बरती। आरोपी की दरिंदगी और पुलिस के इस ढुलमुल व लापरवाह रवैये के कारण ही वह बेजुबान तड़प-तड़पकर मौत के मुंह में समा गया।
धरने पर बैठे गौरक्षा दल भिवानी के प्रधान संजय परमार ने कहा कि वे प्रशासन से सीधा सवाल पूछते हैं कि बेजुबान पर अत्याचार करने वाले आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया।
परमार ने कहा कि यदि किसी के घर में इंसान के साथ ऐसी हैवानियत होती, तो पुलिस तुरंत एक्शन लेती। लेकिन यह एक बेजुबान गधा था, इसलिए पुलिस ने 27, 28 और 29 सितंबर तक कोई कार्रवाई नहीं की और हमारी गुहार को अनसुना कर दिया। जब हमने धरने पर बैठने की बात कही, तब 30 सितंबर को पुलिस ने उसका मेडिकल करवाया और आरोपी को उसे इलाज के लिए हिसार ले जाने को बाध्य किया, जहां इलाज के दौरान उस बेजुबान की मौत हो गई। अगर समय रहते ही कार्रवाई हो जाती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। आरोपी ने तो अपना जुर्म किया ही, लेकिन इस बेजुबान की मौत में पुलिस की लापरवाही का भी पूरा हाथ है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, गौरक्षा दल भिवानी का यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। गौरक्षा दल भिवानी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस व प्रशासन की होगी। इस अवसर पर भीम भाटी, डॉक्टर कृष्ण वर्मा, बलदेव, हितेश गुजरानी, सावन, रवि, राहुल, अतुल, हिमांशु, योगी, मोनू राणा, शशीकांत, दिनेश सैनी, निखिल, रीतिक, कुकी परमार सहित अन्य गौसेवक मौजूद रहे।
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