Dharm Desk – नवग्रहों की स्थिति और शुभ-अशुभ प्रभाव का सीधा प्रभाव इंसान के स्वभाव, रहन-सहन और दैनिक जीवन पर पड़ता है। जब किसी इंसान की जन्मकुंडली या हस्तरेखा में कोई ग्रह कमजोर या विपरीत परिस्थिति में होता है।तो उसका असर केवल किस्मत पर ही नहीं बल्कि इंसान के दैनिक जीवन और व्यवहार में भी दिखाई देने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई छोटे-छोटे संकेत होते हैं जिनसे यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सा ग्रह जीवन में हानिकारक असर डाल रहा है। क्योंकि बहुत बार लोग अपने आस-पास होने वाली छोटी-छोटी बातों या अपनी आदतों को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार ये किसी ग्रह के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत हो सकती हैं।जैसे शनि को अनुकूल करने के लिए घर में साफ-सफाई रखना, शुक्र के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना और सूर्य के लिए स्वाभिमानी व ईमानदार व्यवहार अपनाना लाभदायक माना जाता है। ग्रहों के संतुलन से न केवल इंसान का स्वभाव सुधरता है। बल्कि उसके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।

1.मंगल का प्रभाव
यदि किसी मनुष्य का मंगल ग्रह अनुकूल नहीं है तो उसे बार-बार वाहनों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में गाड़ियों पर अक्सर खरोंच आना या दुर्घटनाएं होना आम बात मानी जाती है।
2.शनि का प्रभाव
घर की व्यवस्था और निजी स्वच्छता शनि ग्रह से जोड़कर देखी जाती है। जब शनि की स्थिति अच्छी नहीं होती तो इंसान के घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखरे रहते हैं और उनके पैर अक्सर गंदे बने रहते हैं।
3.शुक्र का प्रभाव
शुक्र को सौंदर्य, स्वच्छता और आकर्षण का कारक माना गया है। जब शुक्र कमजोर होता है तो इंसान को नहाने के कुछ ही घंटों बाद शरीर से दुर्गंध आने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
4.सूर्य का प्रभाव
सूर्य आत्म-सम्मान, तेज और निष्ठा का प्रतीक होता है। यदि सूर्य की विपरीत परिस्थितियां हो तो इंसान हर चीज पर छूट मागने की प्रवृत्ति आ जाती है और उसे बिना मेहनत के चीजें पाने यानी मुफ्तखोरी की आदत लग जाती है।


