कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। राहुल गांधी के बयानों को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार तेज कर दिया है। हरियाणा भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 1980 में नौ राज्यों की गैर-कांग्रेसी सरकारों को बर्खास्त करने और 2005 में बिहार विधानसभा भंग करने के घटनाक्रम का जिक्र किया। स्मृति ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर वह किस एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं।

स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भाजपा पर हमला बोलते हुए कांग्रेस के उस इतिहास को भी सामने ले आए हैं, जिस पर पार्टी को जवाब देना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

1980 में नौ राज्यों की सरकारें बर्खास्त करने का मुद्दा उठाया

स्मृति ईरानी ने अपने बयान में संविधान के अनुच्छेद 356 का उल्लेख किया। यह अनुच्छेद किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल होने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान करता है।

उन्होंने 1980 के घटनाक्रम की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इस प्रावधान का इस्तेमाल कर नौ राज्यों की गैर-कांग्रेसी सरकारों को बर्खास्त कर दिया था।

दरअसल, फरवरी 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की सरकारों को हटाकर राष्ट्रपति शासन लागू किया था। इस फैसले के बाद केंद्र और राज्यों के बीच संवैधानिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हुई थी।

स्मृति ईरानी ने इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल खड़े किए। उनका तर्क है कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने पुराने फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए।

बिहार विधानसभा भंग करने के फैसले का भी किया जिक्र

भाजपा नेता ने अपने बयान में वर्ष 2005 के बिहार विधानसभा प्रकरण को भी उठाया। उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया और बाद में विधानसभा भंग करने का फैसला लिया गया।

इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी। जनवरी 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2005 को विधानसभा भंग करने की अधिसूचना को असंवैधानिक करार दिया था।

स्मृति ईरानी ने इसी फैसले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि संवैधानिक मर्यादाओं की बात करने वाली कांग्रेस को अपने शासनकाल के ऐसे मामलों पर भी जवाब देना चाहिए।

चुनाव आयोग को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना

स्मृति ईरानी ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के बयानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस बार-बार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि वह आखिर किस एजेंडे के तहत इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा नेता का कहना है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

स्मृति ईरानी का यह बयान भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव की एक और कड़ी है। कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भाजपा लगातार जवाब दे रही है। वहीं, कांग्रेस भी चुनावी व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखती रही है।

इस पूरे विवाद में दोनों दल लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं। स्मृति ईरानी ने पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देकर राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरने की कोशिश की है। अब इस बयान पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद राजनीतिक बहस और आगे बढ़ सकती है।