तुर्की की संसद में पाकिस्तान और सऊदी अरब से 10 वर्षों के लिए किए गये ‘मक्का पैक्ट’ को लेकर भारी बवाल शुरू हो गया है. मक्का समझौते को लेकर तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान घर में ही घिर गए हैं. दरअसल, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा.

तुर्की की संसद ने शुक्रवार को सऊदी अरब और पाकिस्तान वाले ‘मक्का पैक्ट’ विधेयक को पास कर दिया है.  279 सांसदों ने समर्थन में और 119 सांसदों ने बिल के विरोध में मतदान किया.

पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का समझौते को लेकर अब राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की विरोधी नेता ने मोर्चा खोल दिया. तुर्की की संसद में इस समझौते को मंजूरी देने के लिए चर्चा के दौरान जमकर हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली.

विपक्षी सांसदों ने तुर्किए के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए पूरा है कि अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो क्या तुर्किए इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होगा? एर्दोगान सरकार की तरफ से इस सवाल का जवाब में विदेश मामलों के अधिकारी फुअत ओकताय ने कहा कि तुर्किए को उसकी मर्जी के खिलाफ किसी भी युद्ध में शामिल नहीं किया जा सकता है.

दरअसल, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में तीनों के बीच संयुक्त रक्षा की जिम्मेदारी होगी. समझौते में एक और अहम शर्त है. इसके तहत शुरुआती 10 साल तक कोई भी देश सामान्य प्रक्रिया के जरिए इससे बाहर नहीं निकल सकेगा.

‘कुर्द-समर्थक’ पीपल्स इक्वेलिटी एंड डेमोक्रेसी पार्टी’ की डिप्टी ग्रुप लीडर गुलिस्तान किलिच कोचयिगित ने ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ का कड़ा विरोध किया है. तुर्किए की संसद में मक्का समझौते के ऊपर हो रही वोटिंग के दौरान विपक्षी सांसदों ने एर्दोगान सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई.

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