हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए रखा जाता है. जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत (Som Pradosh Vrat) कहा जाता है. आज 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है. सोम प्रदोष व्रत (Som Pradosh Vrat) भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल में शिव पूजा का सबसे शुभ समय शाम 6:29 से रात 8:53 बजे तक रहेगा. इस समय भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा और अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे श्रेष्ठ व्रतों में से एक माना जाता है. विशेष रूप से जब यह व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसका महत्व और बढ़ जाता है. प्रदोष व्रत को करने से जीवन में सुख और शांति आती है. वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
अभिषेक के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
प्रदोष व्रत की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है. शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग ऊपर की ओर रखना चाहिए. भगवान शिव को कुमकुम या हल्दी अर्पित नहीं की जाती. पूजा के दौरान मन को शांत रखकर सकारात्मक भाव से भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए. इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक करने की परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है.
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक विधवा ब्राह्मणी अपने छोटे पुत्र के साथ रहती थी. वह भिक्षा मांगकर जीवन यापन करती थी और हर प्रदोष तिथि पर भगवान शिव का व्रत रखती थी. एक दिन उसे रास्ते में एक घायल राजकुमार मिला, जिसे वह अपने घर ले आई और उसकी सेवा की. बताया जाता है कि वह विदर्भ देश का राजकुमार था, जिसके पिता को शत्रुओं ने बंदी बना लिया था और राज्य छीन लिया था.
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