सोनीपत। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच निजीकरण का मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। कर्मचारियों के आंदोलन को अब राजनीतिक दलों और पंचायत प्रतिनिधियों का भी समर्थन मिलने लगा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोनीपत की इंदिरा कॉलोनी स्थित बिजली घर पहुंचे और कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
इनेलो के जिला अध्यक्ष कुणाल गहलावत ने कहा कि बिजली कर्मचारियों की मांगें जायज हैं और उनकी पार्टी इस संघर्ष में कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की ओर से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई।
25 साल के लाइसेंस पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग
कुणाल गहलावत ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की कि विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत आवश्यक कार्रवाई करते हुए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले को रद्द करवाया जाए। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इनेलो ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और निजीकरण से जुड़े निर्णयों पर सरकार को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कर्मचारियों के आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन
बिजली कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे इनेलो नेताओं और पंचायत प्रतिनिधियों का आभार जताया। यूनियन के अनुसार, अलग-अलग राजनीतिक दलों और पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई जा रही है। इससे आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों का मनोबल बढ़ रहा है।
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर मिल रहा समर्थन उनके संघर्ष को मजबूती दे रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करेगी।
निजीकरण से आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर
बिजली कर्मचारी यूनियन ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण केवल कर्मचारियों तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यूनियन की आशंका है कि निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ने से भविष्य में बिजली की दरों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से महंगाई का सामना कर रहे लोगों के लिए बिजली खर्च में संभावित बढ़ोतरी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए बिजली व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव से पहले उसके व्यापक प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए।
सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया रोकने की मांग
बिजली कर्मचारी यूनियन ने सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। यूनियन का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा से संबंधित फैसले लेते समय कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ आम जनता की आर्थिक स्थिति और उपभोक्ताओं की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
फिलहाल, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच निजीकरण का मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। राजनीतिक दलों और पंचायत प्रतिनिधियों के समर्थन के बीच अब इस मामले में सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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