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फीचर स्टोरी. छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार शहर से लेकर गाँवों तक लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवा देने में सफल साबित होती नजर आ रही है. राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी तीन योजनाओं का राज्य भर में व्यापक असर दिख रहा है. सरकार की ओर से जारी आँकड़ों ने योजनाओं की सफलता के साथ ही यह भी बता दिया कि यह योजना राज्य के लोगों के बहुत ही महत्वपूर्ण है.

दरअसल छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई योजनाएं संचालित है. इनमें मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, दाई-दीदी क्लिीनिक योजना और हाट-बाजार क्लिीनिक योजना प्रमुख से शामिल हैं. इन योजनाओं का राज्य भर में अच्छा क्रियान्यवन हुआ है. आँकड़ों के मुताबिक इन योजनाओं से प्रदेश भर में 50 लाख अधिक लोगों को लाभ मिला है.

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना मुख्य रूप से नगरीय क्षेत्रों में संचालित है. इस योजना के तहत एक अस्पताल की तरह एक मोबाइल वैन तैयार किया गया है. यह मोबाइल वैन शहर के विभिन्न मोहल्लों में घूम-घूम कर लोगों को मुफ्त इलाज मुहैया कराता है. वैन में मेडिकल टीम तैनात रहती है. मेडिकल टीम ब्लड, शुगर, बीपी, बुखार सहित कई तरह की बीमारियों का जाँच कर उन्हें दवाइयाँ मुफ्त प्रदान करती है.

28, 418 कैम्प आयोजित

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक अब तक 20 लाख 6 हजार 401 लोगों को निःशुल्क इलाज मुहैया कराया गया है. इसके तहत राज्य के 169 नगरीय निकायों की स्लम बस्तियों में अब तक मोबाइल मेडिकल यूनिट टीम द्वारा 28 हजार 418 कैम्प लगाकर लोगों की निःशुल्क जांच व उपचार कर दवाईयां दी गई हैं.

14 नगर निगमों में सुविधा

वर्तमान में राज्य के 14 नगर निगम क्षेत्रों में योजना का संचालन किया जा रहा है. योजना के प्रथम चरण की शुरूआत 01 नवम्बर 2020 को हुई थी. इसके तहत 60 मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा स्लम बस्तियों में जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार एवं दवा वितरण की शुरूआत की गई थी.

2022 में योजना का विस्तार
योजना की सफलता को देखते हुए 31 मार्च 2022 को इसका विस्तार पूरे राज्य के नगरीय निकाय क्षेत्रों में किया गया तथा 60 और नई मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गई. इस योजना के तहत अब पूरे राज्य के नगरीय क्षेत्रों के स्लम बस्तियों में चिकित्सक, पैरामेडिकल टीम, मेडिकल उपकरण एवं दवाओं से लैस 120 मोबाइल मेडिकल यूनिट पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया उपलब्ध करा रही है.

20 लाख लोगों को लाभ
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत अब तक 3 लाख 97 हजार 273 मरीजों को पैथालॉजी टेस्ट की सुविधा मुहैया कराने के साथ ही 16 लाख 49 हजार 927 मरीजों को निःशुल्क दवाएं दी गई हैं. इस योजना के तहत लाभान्वित मरीजों में 2 लाख 29 हजार 991 मरीज श्रम विभाग में पंजीकृत हैं.

दाई-दीदी क्लीनिक

गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ में यह अपने तरह की एक अनूठी योजना है. यह योजना पूरी तरह से छत्तीसगढ़ के माताओं और बहनों को समर्पित है. योजना का नाम है- ‘दाई-दीदी क्लीनिक’ है. योजना का संचालन शहरी क्षेत्रों में किया जा रहा है. नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से संचालित योजना उन हजारों महिलाओं को निशुल्क इलाज मुहैया कराया, जो किन्हीं कारणों से अस्पताल नहीं जा पाते, या अपनी पीड़ा चाहकर किसी को बता नहीं या किसी मदद नहीं मांग पाते. खास तौर यह समस्या श्रमिक वर्ग की रहती है. जिनकी पास प्राथमिकता में रोजी-मजदूरी होती है. ऐसे वर्ग की महिलाओं को विशेष स्वास्थ्य लाभ दिलाने ही सरकार दाई-दीदी क्लीनिक योजना की शुरुआत की है.

97 हजार महिलाओं का निशुल्क इलाज

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक योजना के तहत अब तक 96 हजार 887 से ज्यादा महिलाओं का इलाज किया गया है. इनमें 17 हजार 472 महिलाओं के विभिन्न पैथोलॉजी लेब टेस्ट किया गया और 92 हजार 419 महिलाओं को निःशुल्क दवा वितरण की गई है. स्लम बस्तियों में अब तक 1282 शिविर लगाए जा चुके हैं.

दाई दीदी क्लीनिक में महिला स्टाफ के साथ एम. एम. यू के डॉक्टर गरीब तंग बस्तियों में पहुंचकर बीमार महिलाओं का इलाज स्लम इलाके में रहने वाली महिलाओं की विभिन्न बीमारियों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं.

महिला चिकित्सा स्टाफ महिला श्रमिकों एवं उनकी बच्चियों का भी निःशुल्क इलाज कर रहे हैं. मरीजों का पैथोलॉजी संबंधित विभिन्न जांच किये जाते हैं और महिला मरीजों का परामर्श एवं निःशुल्क दवा उपलब्ध करायी जा रही है.

हाट-बाजार क्लीनिक

इसी तरह से सरकार ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के लोगों को मुफ्त इलाज पहुँचाने के लिए हाट-बाजार क्लीनिक योजना की शुरुआत की थी है. इस योजना का व्यापक असर दिखा है. विशेषकर जहाँ पर चिकित्सा सुविधा पहुँच पाना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी बेहद कठिन है, वहाँ इस योजना के जरिए आज स्वास्थ्य विभाग ने शिविर के माध्यम से लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया है.

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक इस योजना से अब तक 30 लाख 23 हजार 941 लोगों को इलाज मुहैया कराया गया है. वहीं अब तक प्रदेश के 1839 हाट-बाजार में 79 हजार 859 शिविरों का आयोजन हो चुका है. योजना के अंतर्गत राज्य में 410 डेडिकेटेड ब्राडिंग वाहन तथा चिकित्सा दलों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में लोगों का इलाज किया जा रहा है.

योजना के तहत जरूरतमंदों को निःशुल्क उपचार, चिकित्सीय परामर्श और दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनिमिया, टीबी, कुष्ठ रोग, उच्च रक्तचाप और नेत्र विकारों की जांच भी की जा रही है. इन क्लिीनिकों में शिशुओं और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी किया जा रहा है. हाट-बाजार क्लिीनिकों में ओ.पी.डी. आधारित आठ प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. जांच के बाद व्याधिग्रस्त पाए गए लोगों को निःशुल्क दवाईयां भी दी जाती हैं. जिन मरीज़ों को उच्च स्तरीय जाँच अथवा उपचार की आवश्यकता होती है उन मरीज़ो को हाट-बाज़ार क्लिीनिक से सीधे स्वास्थ्य केंद्र में रिफर भी किया जा रहा है जिससे उनका सम्पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा सके.

एक नजर इन आँकड़ों पर भी-
योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक छह लाख 39 हजार 901 लोगों के उच्च रक्तचाप
पांच लाख 18 हजार 10 लोगों की मधुमेह
दो लाख 50 हजार 686 लोगों की मलेरिया जांच
दो लाख 75 हजार 509 लोगों की रक्त-अल्पता (एनीमिया)
एक लाख 614 लोगों में नेत्र विकारों की जांच.
25 हजार 962 लोगों की टीबी
7761 लोगों की कुष्ठ
19 हजार 352 लोगों की एचआईव्ही जांच
52 हजार 822 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच के साथ ही 73 हजार 805 डायरिया पीड़ितों का भी उपचार किया गया है.

जिलेवार आँकड़ा
बालोद जिले में एक लाख 74 हजार 362
बलौदाबाजार-भाटापारा में 55 हजार 190
बलरामपुर-रामानुजगंज में 74 हजार 823
बस्तर में 85 हजार
बेमेतरा में दो लाख 16 हजार 90
बीजापुर में 96 हजार 222
बिलासपुर में एक लाख 69 हजार 888
दंतेवाड़ा में 92 हजार 808
धमतरी में 34 हजार 894
दुर्ग में 96 हजार 297
गरियाबंद में एक लाख तीन हजार 462
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 57 हजार 342
जांजगीर-चांपा में 80 हजार 548 और जशपुर में एक लाख 27 हजार 857 लोगों का इलाज किया गया है.

इसी तरह से
कबीरधाम में 62 हजार 520
कांकेर में एक लाख 21 हजार 498
कोंडागांव में 61 हजार 603
कोरबा में 95 हजार 76
कोरिया में 78 हजार 370
महासमुंद में एक लाख 82 हजार 514
मुंगेली में 62 हजार 858
नारायणपुर में 32 हजार 864
रायगढ़ में दो लाख 37 हजार 456
रायपुर में 80 हजार 317
राजनांदगांव में एक लाख 90 हजार 712
सुकमा में 42 हजार 237
सूरजपुर में दो लाख 24 हजार 495 और सरगुजा जिले में 99 हजार 758 लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

जरूरी है कि इन योजनाओं का और बेहतर से बेहतर क्रियान्वयन हो. योजनाओं की सफलता को लोगों को मिलने वाली सुविधाएं ही है. निश्चित ही ऐसी योजनाओं से ही सरकार पर जनता का भरोसा बढ़ता है.