विशेष : दुर्ग के हिस्से अब एक बड़ी सौगात, शासकीय मेडिकल कॉलेज से एक नई शुरुआत …

फीचर स्टोरी। छत्तीसगढ़…एक नए सपने और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. ये सपना है ‘नवा छत्तीसगढ़ का’. उस छत्तीसगढ़ का जिसका सपना पुरखों ने देखा था. उस छत्तीसगढ़ का जिसके स्वप्नदृष्टा थे डॉ. खूबचंद बघेल. सपना उस छत्तीसगढ़ का जिसके लिए जीये और मरे थे डॉ. चंदूलाल चंद्राकर. उसी छत्तीसगढ़ के एक गढ़ ‘दुर्ग’ से आते थे पृथक राज्य छत्तीसगढ़ आंदोलन के अग्रदूतों में से एक रहे डॉ. चंदूलाल चंद्रकार. आज महान पुरखों के इस दुर्ग को एक बड़ी सौगात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी है. राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देने की दिशा में मुख्यमंत्री ने जो काम किया है वह भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है.

बात दुर्ग के हिस्से आई एक बड़ी सौगात की हो रही है. बात शासकीय मेडिकल कॉलेज के साथ एक नई शुरुआत की हो रही है. जी हाँ ! दुर्ग में भी लोगों को सस्ता और सुलभ मेडिकल सुविधा उपल्बध होंगी. राज्य सरकार ने इसके लिए चंदूलाल चंद्राकर निजी मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण कर लिया है. इस प्रकिया के लिए विधानसभा में छत्तीसगढ़ चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय दुर्ग (अधिग्रहण) विधेयक 2021 ध्वनिमत से पारित कर किया गया. इस विधयेक के पास होने साथ दुर्ग वासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग भी पूरी हो गई है.

दुर्ग में शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलने का संकल्प हुआ पूरा- टीएस सिंहदेव

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि राज्य सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव पर सहमति देते हुए इसके लिए प्रयास करने को कहा था. दो वर्ष पहले केन्द्र सरकार द्वारा पूरे देश में 75 मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रावधान बजट में किया था और राज्य सरकार से इसके लिए प्रस्ताव मांगे थे. छत्तीसगढ़ में तीन मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव था, जिस पर राज्य सरकार ने कांकेर, कोरबा और महासमुंद में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव भेजा था, जिनकी सहमति केन्द्र से मिली. छत्तीसगढ़ के संचालित 6 मेडिकल कॉलेजों को और इन 3 मेडिकल कॉलेज को मिलाकर प्रदेश के 9 लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे.

छात्रों के साथ जनहित में महत्वपूर्ण निर्णय- मोहन मरकाम

मोहन मरकाम ने कहा कि राज्य सरकार ने छात्र-छात्राओं के हित में इस मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि एक मेडिकल कॉलेज के संचालन में लगभग 200 करोड़ रूपए का वित्तीय भार प्रतिवर्ष आता है. चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति मेडिकल कॉलेज के संचालन में साल में 140 करोड़ रूपए का वित्तीय भार आएगा.

कोरोना की दूसरी लहर में 5000 लोगों की बचाई जान- देवेन्द्र यादव

विधायक देवेन्द्र यादव ने कहा कि कोरोना की दूसरी सेक्टर-9 अस्पताल की कमियां हम सबने देखी. उसी दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि सेक्टर-9 अस्पताल को राज्य शासन द्वारा सर्वसुविधा युक्त बनाया जाएगा. इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन और सेल के अधिकारियों से लगातार चर्चा की. लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा एनओसी नहीं दी गई. कोरोना की दूसरी लहर के समय चंदूलाल चन्द्राकर मेडिकल कॉलेज की अधोसंरचना का उपयोग करके 5000 लोगों की जान बचाई जा सकी थी.

विधायक अरूण वोरा ने कहा कि इस अधिग्रहण से 750 बेड बढ़ जाएंगे और प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़कर 1370 हो जाएगी.

विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने कहा कि लोक कल्याणकारी भावना और छात्र हितकारी भावना को ध्यान में रखकर यह अधिग्रहण किया जा रहा है. इससे एक बनी बनाई एक अच्छा इन्फ्रास्ट्रचर मिल जाएगा.

विधायक देवव्रत सिंह ने कहा कि इस निर्णय में छत्तीसगढ़ की अस्मिता और स्वाभिमान का ध्यान रखा गया है.
इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दुर्ग सहित राजनांदगांव, कवर्धा, बेमेतरा और बालोद के गरीब लोगों के इलाज की व्यवस्था हो सकेगी. इसके अधिग्रहण के निर्णय से क्षेत्र के लोगों में खुशी है. विधायक डॉ. विनय जायसवाल ने कहा कि इस मेडिकल कॉलेज से हर वर्ष 150 डॉ. मिलेंगे.

चिकित्सा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि किसी भी राज्य में निजी मेडिकल कॉलेज के लिए एमसीआई तभी अनुमति देती है, जब राज्य सरकार की ओर से यह लिखित में दिया जाता है कि वह इस कॉलेज में अध्ययनरत बच्चों के हितों की पूरी तरह से सुरक्षा करेगी. कई राज्यों में निजी मेडिकल कॉलेजों की मान्यता समाप्त होने के बाद अध्ययनरत छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा इस तरह के कदम उठाए गए हैं. उन्होंने उत्तराखंड के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख करते हुए बताया कि जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार मेडिकल छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए नैतिक रूप से जवाबदार है.

महत्वपूर्ण बिंदू

विगत कई वर्षों में पूर्व में उपेक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु अनेक उपाय किये गये हैं. सैकड़ों करोड़ की अतिरिक्त राशि व्यय की गई है.

कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप भविष्य में भी जारी रहने की पूर्ण आशंका है.

ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अभी भी चुनौती है.

नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण में 400 से 500 करोड़ रुपए तथा 3 से 4 वर्ष की अवधि लगती है.

इस मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण से हर वर्ष 150 नए डॉक्टर मिलेंगे.

मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण भू-अर्जन के नियमों के तहत किया जाएगा.

मेडिकल कॉलेज के प्रमोटर्स के अन्य विधिक, आर्थिक दायित्व का भार सरकार पर नहीं पड़ेगा.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के निवासियों तथा कॉलेज के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्वर्गीय चन्दूलाल चन्द्राकर की पुण्यतिथि के अवसर पर 2 फरवरी 2021 को आयोजित कार्यक्रम में चन्दूलाल चन्द्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज कचांदुर के राज्य शासन द्वारा अधिग्रहण की घोषणा की. शासन स्तर पर अधिग्रहण के सभी पहलुओं का परीक्षण करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई. इस समिति ने भी कॉलेज का अधिग्रहण करने की अनुशंसा की. समिति की अनुशंसा के उपरांत विधि विभाग से परीक्षण और परिमार्जन करके कॉलेज का अधिग्रहण करने के लिए विधेयक तैयार किया गया. जिसकी स्वीकृति मंत्री परिषद द्वारा दी गई.

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