Business Desk- Starlink India Entry Controversy : एलन मस्क ने मुकेश अंबानी पर तंज कसते हुए पूछा है कि क्या भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोकने के पीछे उनका प्रभाव है? उन्होंने दावा किया कि कंपनी पिछले पांच साल से भारत सरकार की शर्तें मान रही है, फिर भी उसे लाइसेंस मिलने में देरी हो रही है।

मस्क का कहना है कि स्टारलिंक से उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंच सकता है, जहां आज भी कनेक्टिविटी की समस्या है। इस विवाद में राहुल गांधी भी कूद पड़े हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने बाजार में भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है।

मस्क ने अंबानी को क्यों कहा ‘प्रधानमंत्री’?

स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी जी।’ उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें यह समझने में भूल हुई कि भारत के असली मालिक अंबानी हैं।

मस्क ने आगे कहा कि अंबानी देश के बड़े लोगों के बीच अपना एकाधिकार और फायदा बनाए रखना चाहेंगे, लेकिन क्या वे स्टारलिंक को भारत में मुकाबला करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?

मस्क ने यह भी कहा कि भारत समेत दुनिया के हर देश में ऐसे इलाके हैं, जहां इंटरनेट की पहुंच नहीं है। इससे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और छोटे कारोबारियों को अपना सामान दुनिया भर के बाजारों में बेचने का मौका नहीं मिलता। उनके मुताबिक, स्टारलिंक इन लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकता है।

‘5 साल से शर्तें मान रहे, फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं?’

इससे पहले गुरुवार को मस्क ने सवाल उठाया था कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से ज्यादा देशों में सेवा देने की मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी पिछले पांच साल से भारत सरकार के कानूनों और जरूरी शर्तों का पालन कर रही है। इसके बावजूद उसे भारत में लाइसेंस क्यों नहीं मिला? उन्होंने पूछा था कि क्या अंबानी देश के ‘रियल बॉस’ हैं?

मस्क का आरोप है कि कुछ बड़े कारोबारी स्टारलिंक की एंट्री रोककर बाजार में अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, ये मस्क के आरोप हैं। अंबानी की ओर से इन आरोपों पर कोई जवाब इस कॉपी में शामिल नहीं है।

राहुल गांधी ने भी ली चुटकी, मस्क ने दिया जवाब

मस्क के ‘रियल बॉस’ वाले पोस्ट पर राहुल गांधी ने X पर लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, इलॉन। दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए।’

राहुल के इस जवाब पर मस्क ने धन्यवाद देते हुए कहा कि यह वाकई परेशान करने वाला है। राहुल गांधी के ‘दूसरे शख्स’ वाले इशारे को उद्योगपति गौतम अडाणी से जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल अक्सर नरेंद्र मोदी सरकार, अडाणी और अंबानी के बीच सांठगांठ के आरोप लगाते रहे हैं।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

स्टारलिंक की एंट्री में भेदभाव के आरोपों पर केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के नियम सभी कंपनियों के लिए समान हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि नियमों के जरिए किसी कंपनी के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप गलत है।

भारत में स्टारलिंक की कितनी तैयारी?

स्टारलिंक ने देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई हैं। ये जमीन पर बने स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक सैटेलाइट्स को मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ते हैं। इन साइट्स पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं, ताकि इंटरनेट सिग्नल ट्रांसफर किए जा सकें।

कंपनी भारत में नेटवर्क विस्तार के लिए रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ शुरुआती सहमति पत्र यानी MoU भी साइन कर चुकी है। इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय सरकार के साथ सेवाएं शुरू करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर किए हैं।

5 सवाल-जवाब में समझिए Starlink Internet

  1. स्टारलिंक क्या है?

स्टारलिंक, स्पेसएक्स का सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट है। इसके जरिए उन इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। इसके सैटेलाइट पृथ्वी के करीब चक्कर लगाते हैं।

  1. लाइसेंस मिलने में देरी क्यों हुई?

दी गई जानकारी के मुताबिक, स्टारलिंक 2022 से भारत में सेवा शुरू करने की कोशिश कर रही थी। डेटा सिक्योरिटी और कॉल इंटरसेप्शन जैसी सुरक्षा शर्तों के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। कॉपी में कंपनी की ओर से इन शर्तों का पालन करने का दावा किया गया है। हालांकि, लाइसेंस की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

  1. आम लोगों को क्या फायदा होगा?

दूरदराज के गांवों और पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट मिलने से ऑनलाइन पढ़ाई, टेलीमेडिसिन और कारोबार को मदद मिल सकती है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से इंटरनेट सेवाओं की गुणवत्ता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, लेकिन सस्ते प्लान मिलने की गारंटी नहीं है।

  1. भारत मस्क के लिए क्यों अहम है?

भारत एक बड़ा इंटरनेट बाजार है। यहां सेवा शुरू होने से स्टारलिंक को नए ग्राहक मिल सकते हैं और कारोबार बढ़ सकता है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मस्क की तनातनी और स्पेसएक्स के कॉन्ट्रैक्ट्स पर संभावित असर का जिक्र भी इस कॉपी में किया गया है।

  1. स्टारलिंक का इंटरनेट घर तक कैसे पहुंचेगा?

सैटेलाइट से इंटरनेट सिग्नल स्टारलिंक की डिश तक पहुंचता है। इसके लिए किट में डिश, Wi-Fi राउटर, पावर सप्लाई केबल और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। डिश को खुले आसमान के नीचे रखना पड़ता है। कंपनी का ऐप iOS और Android दोनों पर उपलब्ध है, जिससे सेटअप और नेटवर्क की निगरानी की जा सकती है। इंटरनेट की लेटेंसी का मतलब डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में लगने वाला समय है।