Business Desk- Stock Market Crash : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी के बाद बाजार पर दबाव और बढ़ गया। दरों में बढ़ोतरी की संभावना पहले से जताई जा रही थी, इसलिए घोषणा से पहले ही बाजार में कमजोरी दिखाई देने लगी थी। घोषणा के बाद बिकवाली और तेज हो गई।

सेंसेक्स इंट्रा-डे में 547.08 अंक टूटकर 72,520.73 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 197.85 अंक गिरकर 22,578.25 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि व्यापक बाजार में पूरी तरह एकतरफा गिरावट नहीं है। निफ्टी मिडकैप 100 में कमजोरी है, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की बढ़त बनी हुई है।
10:10 बजे बाजार की स्थिति
सुबह 10:10 बजे सेंसेक्स 397.02 अंक यानी 0.54% की गिरावट के साथ 72,670.79 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 157.45 अंक यानी 0.69% टूटकर 22,618.65 के स्तर पर पहुंच गया था।
बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं। इनमें रिजर्व बैंक की ब्याज दर में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल है।
पहली वजह: ब्याज दर में बढ़ोतरी
भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी बताई गई है। ब्याज दर बढ़ने से कर्ज की लागत बढ़ सकती है और इसका असर वित्तीय कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से गैर-बैंक ऋणदाताओं के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। इसकी वजह यह है कि कर्ज से होने वाली कमाई की तुलना में कंपनियों की फंडिंग लागत तेजी से बढ़ सकती है।
इसका असर खास तौर पर निश्चित ब्याज दर वाले वाहन ऋण और सूक्ष्म वित्त कंपनियों पर ज्यादा पड़ सकता है। वहीं बदलती ब्याज दर के आधार पर कर्ज देने वाली आवास वित्त कंपनियों की स्थिति इसके मुकाबले बेहतर रह सकती है।
दूसरी वजह: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय शेयर बाजार का दबाव बढ़ाया है। पश्चिमी एशिया से तेल की आपूर्ति बढ़ने के बावजूद अमेरिका में तूफान के खतरे से तेल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
इसके अलावा सऊदी अरब पर हूती हमलों के कारण भी बाजार में चिंता बढ़ी है। इन वजहों से ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1% बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर लागत का दबाव बढ़ सकता है।
तीसरी वजह: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को लगातार आठवें कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध बिकवाली की।
मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने 2,961.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। लगातार कई कारोबारी सत्रों तक विदेशी पूंजी की निकासी से बाजार की धारणा पर दबाव बढ़ रहा है।
निफ्टी को लेकर क्या है आगे का अनुमान?
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स के मुताबिक, एक कारोबारी दिन पहले आई तेजी अनुमान के मुताबिक 22,800 के आसपास रुक गई। हालांकि बाजार में आगे बढ़ने की संभावना अभी बनी हुई है।
उनके मुताबिक निफ्टी आगे 22,930 या 23,100-23,120 के स्तर तक जा सकता है। हालांकि बाजार में नीचे की ओर दबाव भी बना हुआ है। अगर निफ्टी 22,690 के ऊपर टिक नहीं पाता है तो उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
आनंद जेम्स के मुताबिक, जब तक गिरावट 22,574 के स्तर तक सीमित रहती है, तब तक बाजार में दोबारा तेजी लौटने की उम्मीद बनी रह सकती है। वहीं फिलहाल निफ्टी के 22,050 के नीचे जाने तक बड़ी गिरावट की संभावना नहीं मानी जा रही है।

