Business Desk – Stock Market FPI Selling : विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला जारी है। अक्टूबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 44,166 करोड़ रुपए निकाले हैं। इसके साथ ही 2026 में अब तक कुल निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड इसकी प्रमुख वजह हैं। वहीं, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के शेयरों में तेजी भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
सितंबर के बाद अक्टूबर में भी बिकवाली
NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में 35,861 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे। इससे पहले जुलाई में 20,200 करोड़ रुपए और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपए का निवेश किया था।
2026 में अब तक की 3.04 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी, 2025 के पूरे साल में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपए से करीब दोगुनी है।

भारत से पैसा निकालने की वजह क्या है?
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते के मुताबिक, यह भारत के खिलाफ फैसला नहीं, बल्कि ग्लोबल रीपोजिशनिंग है। खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई जोखिम से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हैं।
मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड निवेशकों को दूसरे विकल्पों की ओर खींच रही हैं। उत्तर एशियाई बाजारों में AI कंपनियों की तेजी भी इसका एक कारण है।
गुप्ते ने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव काफी हद तक संभाला है।
निफ्टी इस साल 13.87% गिरा
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय बाजार के कमजोर प्रदर्शन की प्रमुख वजह है। 2026 में अब तक निफ्टी का रिटर्न -13.87% रहा है।
उन्होंने कहा कि 10 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5.2% से ऊपर रहने के कारण विदेशी निवेशकों को दूसरे बाजारों में निवेश करना आकर्षक लग सकता है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने तक बिकवाली जारी रह सकती है। भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक होने पर स्थिति बदल सकती है।
डेट मार्केट से भी निकाला पैसा
विदेशी निवेशकों ने सितंबर में डेट मार्केट से भी निकासी की। फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए 1,921 करोड़ रुपए और वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) से 233 करोड़ रुपए निकाले। हालांकि, जनरल रूट के जरिए 4,729 करोड़ रुपए का निवेश किया।
FPI और FAR क्या हैं?
FPI (Foreign Portfolio Investors): विदेशी निवेशक, जो शेयर, बॉन्ड और दूसरी वित्तीय संपत्तियों में रिटर्न कमाने के लिए निवेश करते हैं।
FAR (Fully Accessible Route): RBI की व्यवस्था, जिसके तहत विदेशी निवेशक पात्र सरकारी सिक्योरिटीज में बिना तय निवेश सीमा के निवेश कर सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की खरीदारी इसे कम कर सकती है। आगे बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी।

