सर्दियों में गुड़ का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा होता है. लेकिन गर्मी में इसकी खपत कम हो जाती है. फिर भी बहुत से घरों में लोग मीठा बनाने के लिए या फिर चाय के लिए गुड़ का ही इस्तेमाल करते हैं. ठंड में तो गुड़ अच्छे से रह जाता है लेकिन गर्मी में यह धीरे-धीरे चिपचिपा हो जाता है या उसमें फफूंदी लग जाती है. लेकिन आज भी गांवों में गुड़ को सालों-साल ताजा रखने का एक पारंपरिक जादुई तरीका बहुत ही मशहूर है. इसमें गुड़ को अच्छी तरह सुखाकर साफ, सूखे मिट्टी के बर्तन में रखा जाता है. गुड़ को लंबे समय तक सुरक्षित और ताज़ा रखने की यह पारंपरिक विधि वास्तव में बेहद प्रभावी और वैज्ञानिक है, आइए जानते हैं इसे कैसे कर सकते हैं और आप भी इस तरीके से गुड़ को कैसे लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं.

क्यों खराब हो जाता है गुड़?
गर्मियों में वातावरण में नमी (humidity) ज्यादा होती है. गुड़ प्राकृतिक रूप से हाइग्रोस्कोपिक होता है, यानी यह हवा से नमी सोख लेता है. इसी कारण यह पिघलने या चिपचिपा होने लगता है. इसमें फफूंदी (fungus) लग सकती है. स्वाद और गुणवत्ता खराब हो जाती है.
पारंपरिक भंडारण विधि (देसी तरीका)
यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक और बेहद कारगर है. इसके लिए गुड़ को पहले धूप में हल्का सुखा लिया जाता है ताकि उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी निकल जाए. सूखे और साफ मिट्टी के बर्तन में गुड़ रखा जाता है. मिट्टी के बर्तन की खासियत है कि यह नमी को संतुलित रखता है. साफ सूखे कपड़े या सूखी पत्तियों से ढक दिया जाता है, ताकि हवा का हल्का आवागमन बना रहे लेकिन नमी अंदर न जाए. अब इसे ऐसी जगह रखा जाता है जहां सीधी धूप न हो, हवा चलती हो और नमी कम हो. कुछ लोग इसमें सोंठ डालते हैं क्योंकि यह नमी को सोखती है और इसमें एंटी-फंगल गुण होते हैं.
इस विधि के फायदे
- गुड़ न पिघलता है, न चिपचिपा होता है.
- फफूंदी नहीं लगती.
- स्वाद, रंग और खुशबू बरकरार रहती है.
- इसके औषधीय गुण (digestive, immunity boost) भी लंबे समय तक बने रहते हैं.
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