दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की 27वीं बैठक शुक्रवार को आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में पर्यावरण मंत्रालय के आदेश के तहत डॉ. एसडी अत्री को आयोग में फुल-टाइम टेक्निकल मेंबर के रूप में दोबारा नियुक्त किए जाने की जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को और मजबूत करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

PM2.5 सबसे बड़ा प्रदूषक

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की बैठक में 33 विशेषज्ञों की एक अहम रिपोर्ट पर विचार किया गया। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार की गई थी। रिपोर्ट में 2015 से 2025 तक के विभिन्न अध्ययनों के आधार पर बताया गया कि PM2.5 कण दिल्ली के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। ये सूक्ष्म कण हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषण की समस्या केवल स्थानीय उत्सर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के राज्यों से आने वाले धुएं और धूल जैसे Regional और Transboundary मूवमेंट का भी बड़ा असर पड़ता है। यानी दिल्ली की हवा पर बाहरी स्रोतों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

सर्दियों में PM2.5 के मुख्य सोर्स

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की बैठक में प्रस्तुत विशेषज्ञ रिपोर्ट के अनुसार PM2.5 प्रदूषण में निम्न प्रमुख स्रोतों की हिस्सेदारी पाई गई, सेकेंडरी पार्टिकुलेट्स (परिवहन, उद्योग, बिजली संयंत्र और बायोमास दहन से बनने वाले) 27%, परिवहन (ट्रांसपोर्ट)  23%, बायोमास दहन  20%, धूल (रोड डस्ट व कंस्ट्रक्शन)  15%, थर्मल पावर प्लांट समेत उद्योग  9% रिपोर्ट से साफ है कि वाहनों का धुआं, उद्योगों का उत्सर्जन, पराली व अन्य बायोमास जलाना और धूल  ये सभी मिलकर राजधानी की हवा को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए इन सभी स्रोतों पर एक साथ सख्त कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि किसी एक क्षेत्र में सुधार से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।

रिपोर्ट में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की हिस्सेदारी इस प्रकार बताई गई

धूल (रोड डस्ट व निर्माण कार्य)  27%

ट्रांसपोर्ट (वाहनों का धुआं) 19%

सेकेंडरी पार्टिकुलेट्स  17%

इंडस्ट्री (उद्योग) 14%

बायोमास दहन (पराली, कचरा आदि जलाना)  12%

विशेषज्ञों का कहना है कि धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, उद्योगों पर सख्ती और खुले में जलाने की घटनाओं पर रोक जैसे कदम उठाए बिना प्रदूषण कम करना मुश्किल होगा।

46 नए CAAQMS स्टेशन लगेंगे

वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत बनाने का फैसला लिया है। आयोग ने 46 नए CAAQMS (Continuous Ambient Air Quality Monitoring Stations) स्थापित करने की मंजूरी दी है। योजना के तहत दिल्ली में 14 नए स्टेशन, हरियाणा में 16, राजस्थान में 1, उत्तर प्रदेश में 15 स्टेशन लगाए जाएंगे

इन स्टेशनों के स्थापित होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में कुल CAAQMS की संख्या बढ़कर 157 हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे प्रदूषण के स्तर की रियल-टाइम निगरानी बेहतर होगी और समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कई अहम फैसले लिए हैं। आयोग ने पराली जलाने से लेकर निर्माण कार्य, उद्योगों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई की दिशा में नई पहल की है।

पराली जलाने पर सख्ती

आयोग ने डायरेक्शन नंबर 96 (13 फरवरी) का संज्ञान लेते हुए राज्यों को 2026 में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए समन्वित और समयबद्ध कार्य योजना लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत राज्यों को निगरानी, वैकल्पिक समाधान और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

निर्माण और उद्योग पर कड़े नियम

निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरे के प्रबंधन तथा धूल नियंत्रण प्रोटोकॉल को लेकर ड्राफ्ट डायरेक्शन नंबर 97 को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों के लिए पीएम उत्सर्जन मानकों को और सख्त करने के उद्देश्य से ड्राफ्ट डायरेक्शन नंबर 98 को भी मंजूरी मिल गई है।

वाहन प्रदूषण और ट्रैफिक पर चिंता

आयोग ने टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट को दी गई रिपोर्ट की समीक्षा की। वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और जाम को कम करने के लिए Barrier-Free Multi Lane Free Flow (MLFF) सिस्टम, RFID और ANPR तकनीक को जल्द लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि बिना रुके वाहनों की आवाजाही हो सके और प्रदूषण घटे।

2026 एक्शन प्लान की समीक्षा

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की बैठक में राज्यों, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों द्वारा तैयार 2026 एक्शन प्लान की भी समीक्षा की गई। इन योजनाओं में ट्रांसपोर्ट, उद्योग, धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और बायोमास बर्निंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संरचनात्मक और दीर्घकालिक उपाय शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित करना है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि इन एक्शन प्लान की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और सभी संबंधित एजेंसियों को वैधानिक निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। साथ ही कहा गया कि तय समयसीमा के भीतर उपाय लागू करने में लापरवाही बरतने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

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