Supreme Court On Stray Dogs Case: आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (7 जनवरी) को सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने मामले की सुनवाई की। बहस में कुत्तों के मूड, कुत्तों की काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे शब्द सामने आए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने अदालत में कुत्ते प्रेमियों का बचाव किया। अदालत ने पूछा, आप कुत्तों की बात कर रहे हैं, लेकिन मुर्गियों और बकरियों के बारे में क्या? सिबल ने जवाब दिया- इसी वजह से मैंने मुर्गियां खाना छोड़ दिया है। सिबल ने कहा कि मुझे आज तक किसी कुत्ते ने नहीं काटा। इसपर बेंच ने पूछा कि- सिब्बल जी, सुबह कुत्ता किस मूड में है, ये कैसे पता चलता है?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में राजस्थान में आवारा पशुओं के कारण दो न्यायाधीशों की गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। कोर्ट ने बेहद चिंताजनक लहजे में कहा कि पिछले 20 दिनों में जानवरों की वजह से न्यायाधीशों के साथ दो हादसे हुए हैं। इनमें से एक न्यायाधीश रीढ़ की गंभीर चोट से जूझ रहे हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, बात सिर्फ काटने की नहीं है, कुत्तों से खतरा भी होता है। दुर्घटनाओं का खतरा। आवारा कुत्तों से सड़कें खाली रखनी होंगी। आप इसकी पहचान कैसे करेंगे? सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते। बहस में आवारा कुत्तों के फेवर में पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा, जब भी मैं मंदिरों वगैरह में गया हूं, मुझे कभी किसी ने नहीं काटा। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया- ‘आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है। लोग मर रहे हैं।’ कपिल सिब्बल ने कहा कुत्ते ने किसी को काटा है, तो आप एक सेंटर को कॉल करें, उसे ले जाया जाएगा, उसकी नसबंदी की जाएगी और उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर कोर्ट ने सवाल उठाए। NHAI ने लगभग 1400 किलोमीटर के संवेदनशील हिस्सों की पहचान की है, जहां मवेशी सड़कों पर आ जाते हैं। NHAI के इस तर्क पर कि आगे की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, “NHAI खुद इन संवेदनशील रास्तों की घेराबंदी या फेंसिंग क्यों नहीं कर सकता? सड़क पर मवेशियों को आने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे?”

सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर्स में रखना संभव नहीं- कपिल सिब्बल

डॉग लवर्स की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि देश के सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखना न तो शारीरिक रूप से संभव है और न ही आर्थिक रूप से व्यवहार्य। उन्होंने जोर दिया कि इस समस्या का समाधान वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए और मुख्य मुद्दा मौजूदा कानूनों का सही ढंग से पालन न होना है। जस्टिस संदीप मेहता ने सिब्बल की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पशु क्रूरता निवारण और नसबंदी से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं।

कल भी जारी रहेगी सुनवाई

एक वकील ने कोर्ट को बताया कि शहरों में हजारों डॉग बाइट की घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले अभिषेक कुसुम गुप्ता ने कहा कि हमारी सोसायटी हमारी प्रॉपर्टी है, फैसले का हक हमें मिलना चाहिए। यूपी सरकार के अधिकारी बात नहीं सुनते। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालात सबसे खराब हैं। मेरी बेटी को 7–8 कुत्तों ने काटा था, यह बड़ी खबर बनी थी। उन्होंने मांग की कि सोसायटी से कुत्तों को हटाया जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित बाहर खेल सकें। जस्टिस जे. नाथ ने कहा कि कोर्ट इन घटनाओं से वाकिफ है और अब ठोस समाधान चाहती है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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