Lalluram Desk. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ‘तहलका’ के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बलात्कार के एक मामले में मिली 10 साल की कठोर कारावास की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। यह सजा बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाई थी, जिसने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया था।

2013 के बलात्कार मामले में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेजपाल ने गोवा की मापुसा अदालत के सामने सरेंडर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले उन्हें सरेंडर करना होगा। यह मामला एक महिला पत्रकार के आरोपों से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 को एक होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। इन आरोपों के चलते 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने सरेंडर से छूट की मांग खारिज की

पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले (जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था) के खिलाफ अपील दायर करने से पहले सरेंडर करने से छूट मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था।

जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने तेजपाल को अदालत के सामने ‘सरेंडर सर्टिफिकेट’ पेश करने का निर्देश दिया था। एकल-न्यायाधीश (सिंगल-जज) बेंच ने उनकी आपराधिक अपील को 22 सितंबर को सूचीबद्ध (लिस्ट) करने पर सहमति जताई, बशर्ते वे तब तक अपना सरेंडर सर्टिफिकेट जमा कर दें। तेजपाल ने सरेंडर करने से छूट मांगी थी और तर्क दिया था कि पहले उनकी अपील को सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए और उस पर सुनवाई होनी चाहिए।

कानूनी दलीलें और अदालत के निर्देश

तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अदालत के पास यह अधिकार है कि वह उचित मामलों में सरेंडर की शर्त को हटा दे और आरोपी के सरेंडर न करने पर भी उसकी आपराधिक अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर ले। गोवा राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SGI) तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरेंडर से छूट की इस अर्जी पर विचार करते समय मामले के गुण-दोष (मेरिट्स) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला बलात्कार के एक गंभीर अपराध से जुड़ा है, जिसके लिए तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। जस्टिस अराधे ने कहा कि कोर्ट छूट की इस अर्जी पर इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि उसके पास ऐसा करने का अधिकार है।

सिब्बल ने दलील दी कि तेजपाल का मामला हाई कोर्ट द्वारा उनके बरी होने के फैसले को पलटने को चुनौती देता है, और इस अपील के गुण-दोषों पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने हाई कोर्ट के फैसले को देख लिया है, और दोनों पक्षों – तेजपाल या गोवा राज्य – से कहा कि वे अपनी दलीलें केवल छूट के सवाल तक ही सीमित रखें।

कोर्ट ने पूछा कि तेजपाल को सरेंडर करने के लिए कितना समय चाहिए। तीन सप्ताह का समय मांगे जाने पर, कोर्ट ने छूट की अर्जी खारिज कर दी और तेजपाल को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने तथा उसका सबूत पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आगे यह भी निर्देश दिया कि यदि सरेंडर का प्रमाण पत्र जमा कर दिया जाता है, तो बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तेजपाल की अपील को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

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