सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे दुर्घटना से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि मृत यात्री के पास ट्रेन का टिकट नहीं मिलने मात्र से उसके परिवार के मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि दुर्घटना का शिकार व्यक्ति वास्तविक यात्री था या नहीं।
2017 में ट्रेन से गिरकर हुई थी महेशभाई की मौत
जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस ए.एस. चंडुरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें महेशभाई के माता-पिता को मुआवजा देने से इनकार किया गया था।
मामला 27 सितंबर 2017 का है। महेशभाई अहमदाबाद से सूरत जा रहे थे। बताया गया कि जनरल डिब्बे में यात्रा के दौरान अचानक झटका लगने से वे चलती ट्रेन से गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रखा गया, लेकिन 31 अक्टूबर 2017 को चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
टिकट नहीं मिलने को हाईकोर्ट ने माना था अहम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट ने महेशभाई के पास रेलवे टिकट नहीं मिलने की बात को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया। अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि उनके पिता ने शपथ-पत्र में घटना के संबंध में बयान दिया था और महेशभाई लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे थे।
पीठ ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि महेशभाई वास्तविक यात्री थे। ऐसे में केवल टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के आदेश को मिली बहाली
रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने 17 जून 2022 को महेशभाई के माता-पिता को मुआवजे का हकदार माना था। ट्रिब्यूनल ने उन्हें 8 लाख रुपये मुआवजा, साथ ही घटना की तारीख से आदेश की तारीख तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के इस आदेश को बहाल कर दिया।
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