लखनऊ. कांशीराम स्मृति उपवन आशियाना से बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद किया. इस बीच इस धर्मसभा ने स्वामी ने महत्वपूर्ण विषय उठाया. उन्होंने देश में घूम रहे फर्जी शंकराचार्यों का विषय उठाया. साथ ही योगी सरकार से प्रश्न किया. उन्होंने कहा कि प्रदेश का मुख्यमंत्री सदन में खड़े होकर बोलता है कि हर कोई अपने को शंकराचार्य नहीं कर सकता, फिर जिस किसी को तुम कैसे घुमाते हो, तुम्हारे लोग क्यों उसे प्रक्षेय देते हैं? क्यों पुरी के शंकराचार्य जी के ठीक बगल में उसका शिविर लगवाकर उसे संरक्षण देते हो? अधोक्षजानंद नाम का एक व्यक्ति है जो आतंकवादियों से भी संपर्क रखता है.

स्वामी ने सभा को एक वाक्या बताया. ये वाक्या केरल प्रदेश से जुड़ा हुआ था. उन्होंने बताया कि एक बार केरल के मुख्य सचिव का हमारे पास फोन आया. ये बात 8-10 साल पहले की है. स्वामी ने बताया कि पहले तो उन्हें ये फ्रॉड लगा. लेकिन बाद में मुख्य सचिव ने कहा कि हम आपसे जानना चाहते हैं कि पुरी के शंकराचार्य कौन हैं. इस पर स्वामी ने जवाब दिया कि पुरी के शंकराचार्य पूज्यपाद निश्चलानंद सरस्वती जी महराज हैं. तो उन्होंने (मुख्य सचिव) ने कहा कि अधोक्षजानंद पुरी के शंकराचार्य है या नहीं ये बताइए. इस पर स्वामी ने कहा नहीं.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्य सचिव से पूछा कि आप ये सब पूछ क्यों रहे हैं? तब सीएस ने कहा कि उनका (अधोक्षजानंद) प्रोटोकॉल आया था, तो हम शंकराचार्य जी के भक्त हैं, हमने सोचा कि पुरी के शंकराचार्य जी की सेवा हमें केरल के मुख्य सचिव रहते हुए मिल रही है तो हमने उनके लिए राज्य अतिथि का दर्जा जारी किया. इतने से भी हमको संतोष नहीं हुआ तो केरल की सीमा पर हम खुद खड़े होने गए कि हम खुद उनका स्वागत करके उन्हें प्रदेश में लेकर आएंगे. उनको हम लेकर आ रहे थे, रास्ते में एक ढाबा पड़ा तो उन्होंने गाड़ी रुकवाई और खटिया में जाकर ऑर्डर देकर खाने लगे. मैं अपनी गाड़ी में बैठकर देखने लगा और सोचा कि शंकराचार्य ऐसे होते हैं? मेरे को शंका हो गई कि ये शंकराचार्य नहीं हो सकते.

केरल के मुख्य सचिव ने अधोक्षजानंद को दिखाया था प्रमाण

मुख्य सचिव ने आगे कहा कि इसलिए मैंने आपसे संपर्क किया. पहले तो मैं आपको जानता नहीं था, मैंने श्रृंगेरी (श्रृंगेरी पीठ, दक्षिणाम्नाय) में संपर्क किया तो श्रृंगेरी वालों ने भी कहा कि अधोक्षजानंद तो पुरी पीठ के शंकराचार्य नहीं है. फिर भी आपको प्रमाण चाहिए तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से ले लें. बता दें उस समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फर्जी शंकराचार्यों के खिलाफ अभियान चला रहे थे. इसलिए उन्होंने सारे प्रमाण इकट्ठा कर रखे थे. मुख्य सचिव ने स्वामी से कहा कि सारे प्रमाण हमारे पास भेजिए हम इसके (अधोक्ष्जानंद) के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं. स्वामी ने प्रमाण भेजा. फिर सीएस ने अधोक्षजानंद को प्रमाण दिखाकर कहा कि आप या तो इसी समय केरल की सीमा से बाहर निकल जाओ या फिर हम आपको अरेस्ट कर रहे हैं. तो ये (अधोक्षजानंद) बाहर निकल आया.

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बड़भागी हो हिंदुओं कि आपको ऐसे शंकराचार्य प्राप्त हैं- स्वाम अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को शंकराचार्य बनाकर उत्तर प्रदेश की सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री तो बार बार जाकर उन्हें व्यवस्था दे रहे हैं. क्यों? क्योंकि पुरी के शंकराचार्य महराज सनातन धर्म के अनुसार जो सच है वो बोल देते हैं. जो सच बोलेगा उसको परेशान इनके द्वारा किया जाएगा. स्वामी ने कहा कि हम हिंदुओं को कहना चाहते हैं बड़भागी हो कि आपको ऐसे महान शंकराचार्य (स्वामी निश्चलानंद जी महराज) आपके समय में प्राप्त हैं. अन्यथा इतिहास में पढ़ने को मिलता. ऐसे महनीय आचार्य को भी जो लोग अपनी राजनीति को कारण समस्या में डाले हुए हैं, उनके बारे में आपको मोह त्यागना ही होगा.