Dharm Desk :- घर में मंदिर है तो सुबह-शाम पूजा भी जरूर होती होगी। भगवान की मूर्तियां और तस्वीरें भी श्रद्धा के साथ सजाई जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि मंदिर में कौन-सी तस्वीर रखी है और उसका स्वरूप कैसा है? सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में मंदिर में रखी तस्वीरों और मूर्तियों को लेकर कुछ सावधानियां बताई गई हैं। कुछ ऐसे चित्र हैं, जिन्हें पूजा स्थल के लिए सही नहीं माना जाता। अगर आपके घर के मंदिर में भी इनमें से कोई फोटो रखी है तो एक बार उसे जरूर देख लें।

1.पितरों की तस्वीर मंदिर से अलग रखें
पितरों की तस्वीर को घर के मंदिर में देवी-देवताओं के साथ नहीं रखना चाहिए। पितरों के लिए घर में अलग स्थान रखना सही होता है। वास्तु में दक्षिण दिशा को पितरों से जोड़ा गया है। इसलिए उनकी तस्वीर मंदिर के बजाय किसी सही स्थान पर रखना चाहिए। पितृ पक्ष में भी पितरों का स्मरण और पूजन अलग स्थान पर करना चाहिए।

2.भगवान का रौद्र रूप न रखें
भगवान के शांत और प्रसन्न स्वरूप की तस्वीरें मंदिर के लिए सही मानी जाती हैं। वहीं रौद्र या उग्र रूप वाली तस्वीरों को घर के मंदिर में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। भगवान शंकर का नटराज रूप, काल भैरव, माता काली या क्रोधित मुद्रा वाले हनुमान जी के चित्र इसके उदाहरण हैं। मंदिर में आशीर्वाद देती या शांत मुद्रा वाली तस्वीर रखना शुभ होता है।

3.भगवान की मूर्ति खंडित तो नहीं हो गई
बहुत बार पुरानी मूर्ति समय के साथ टूट जाती है। लेकिन लोग उसे श्रद्धा के कारण मंदिर में ही रखे रहते हैं। धार्मिक परंपरा में खंडित मूर्ति को पूजा स्थल पर रखना सही नहीं मानते है। अगर मंदिर में रखी कोई मूर्ति टूट गई है। तो उसे सम्मानपूर्वक वहां से हटा देना चाहिए। उसके विसर्जन या निस्तारण के लिए स्थानीय धार्मिक परंपरा या किसी विद्वान की सलाह ली जा सकती है।

4.मंदिर में महाभारत युद्ध का दृश्य तो नहीं है
महाभारत भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश और धर्म की स्थापना से जुड़ा महान ग्रंथ है। लेकिन इसके युद्ध वाले दृश्य को घर के मंदिर में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी तस्वीर में युद्ध और संघर्ष का दृश्य होता है। मंदिर में इसके बजाय श्रीकृष्ण का शांत स्वरूप, गीता उपदेश या भगवान की आशीर्वाद मुद्रा वाली तस्वीर रखी जा सकती है।

मंदिर में तस्वीर लगाते समय ध्यान रखें

पूजा घर में वही तस्वीरें और मूर्तियां रखना अच्छी है।जिन्हें देखकर मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मक भाव पैदा हों। भगवान की तस्वीर साफ-सुथरी हो मूर्तियां व्यवस्थित हों और मंदिर में अनावश्यक सामान जमा न हो। आखिर मंदिर घर का वह स्थान है, जहां कुछ पल बैठकर मन को शांति मिलती है। इसलिए यहां रखी तस्वीरों का चुनाव भी सोच-समझकर करना चाहिए।