कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने वर्तमान स्थिति को ‘अमंगल दोष’ से ग्रसित बताते हुए कहा कि बिहार के सरकारी अस्पताल अब नरक में तब्दील हो चुके हैं।

​बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव

​तेजस्वी यादव ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि प्रदेश के अस्पतालों में कहीं डॉक्टर गायब हैं, तो कहीं रूई और सुई तक उपलब्ध नहीं है। दवाओं और बेड की कमी तो पुरानी बात हो गई, अब नौबत यहां तक आ गई है कि मरीजों के लिए व्हीलचेयर तक मयस्सर नहीं है। मजबूरन परिजनों को अपने बीमार सदस्यों को साइकिल, चारपाई या स्कूटर पर लादकर ले जाना पड़ रहा है।

​ईंट-गारे के ढांचे और ‘कमीशन’ का खेल

​सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि महज ईंट-गारे की इमारतें खड़ी कर देने से कोई संस्थान मेडिकल कॉलेज नहीं बन जाता। तेजस्वी ने गंभीर आरोप लगाया कि ये बिल्डिंग्स केवल मोटा कमीशन खाने के उद्देश्य से बनवाई गई हैं। जब तक इन अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों, ड्रेसर्स और लैब टेक्नीशियनों की पर्याप्त भर्ती नहीं होगी, तब तक इन आलीशान भवनों में केवल कबूतरों का ही बसेरा रहेगा।

​रेफरल पॉइंट और मेडिकल माफिया का वर्चस्व

​पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबी एनडीए सरकार को गरीबों का दर्द नहीं दिखता। बिहार के सरकारी अस्पताल अब केवल ‘रेफरल पॉइंट’ बन कर रह गए हैं, जहां से मरीजों को जानबूझकर निजी अस्पतालों और मेडिकल माफियाओं के हवाले कर दिया जाता है। उन्होंने भ्रष्टाचार को इस बदहाली की मुख्य वजह बताया।

​17 महीनों के बनाम वर्तमान अराजकता

​तेजस्वी यादव ने अपने कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने 17 महीनों में जो सकारात्मक सुधार किए थे, उन्हें वर्तमान सरकार ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक बार फिर दलालों और भ्रष्ट तंत्र के हवाले सौंप दिया गया है, जिससे आम जनता का जीवन संकट में है।