पटना। बिहार के भविष्य के साथ खिलवाड़ अब जानलेवा हो चुका है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना के मसौढ़ी की छात्रा कोमल कुमारी की दर्दनाक मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए नीतीश-भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। तेजस्वी ने कहा कि दसवीं की छात्रा कोमल, जो अपने माता-पिता की आंखों का तारा और बिहार का सुनहरा भविष्य थी, उसे इस निर्दयी सिस्टम ने आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया। जाम और सड़कों की बदहाली के कारण उसे परीक्षा केंद्र पहुंचने में चंद मिनटों की देरी क्या हुई, प्रशासन ने उसके भविष्य के सारे दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए।
नियमों की बेड़ियां या बेटियों की अर्थियां?
तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल स्कूल का गेट बंद होना नहीं था, बल्कि एक बेटी की उम्मीदों का कत्ल था। कोमल गिड़गिड़ाती रही, मिन्नतें करती रही, लेकिन इस ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’ वाली व्यवस्था का दिल नहीं पसीजा। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि क्या चंद मिनटों की पाबंदी एक अनमोल जीवन से ज्यादा कीमती है? हर तरफ से वीडियो आ रहे हैं जहां हमारी बेटियां सेंटर के बाहर रो रही हैं, लेकिन यह बहरी सरकार संवेदनहीन बनी बैठी है।
मुआवजे और व्यवस्था में सुधार की मांग
तेजस्वी यादव ने दो टूक शब्दों में कहा है कि बिहार अब अपनी बेटियों की बलि और नहीं सहेगा। उन्होंने मांग की है कि कोमल कुमारी के परिजनों को अविलंब उचित मुआवजा दिया जाए और परीक्षा नियमों में तत्काल बदलाव हो। अगर जाम या किसी अन्य जायज कारण से छात्रा को देरी होती है, तो उसे प्रवेश मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बेटियों के सम्मान और जीवन के साथ ऐसा ही खिलवाड़ जारी रहा, तो बिहार की जनता इस ‘क्रूर और निकम्मी’ व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकेगी।
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