दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। सतपुड़ा की वादियों में स्थित लग्जरी और रसूख का ठिकाना ‘फोरसिथ लॉज’ अब वन विभाग की रडार पर है। जिस रिसॉर्ट में एक रात गुजारने के लिए सैलानी 35 हजार रुपये तक लुटाते हैं, वहां वन्यजीवों के अंगों को सजावटी सामान की तरह पेश किया जा रहा था। रईसी के इस प्रदर्शन पर अब वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की तलवार लटक गई है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई क्षेत्र में स्थित यह रिसॉर्ट अपनी ग्रामीण शैली और लग्जरी सुविधाओं के लिए मशहूर है। लेकिन बागड़ा बफर के रेंजर विलास डोंगरे की छापेमारी ने इस चमक-धमक के पीछे का काला सच उजागर कर दिया। रिसॉर्ट में बिना किसी अनुमति के चीतल के चार सींग, सेही के चार कांटे और सांप की दो कांचली नुमाइश के लिए रखी गई थीं। वन विभाग का कहना है कि यह पर्यटकों को लुभाने के लिए किया गया अवैध स्टंट था।
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मायानगरी से चल रहा खेल, ‘अदिति मोदी’ है मालकिन
मिली जानकारी के अनुसार, इस 40 एकड़ में फैले साम्राज्य की कमान मुंबई से संभाली जाती है। इस होटल की मालकिन अदिति मोदी बताई जा रही हैं, जबकि बुकिंग का सारा खेल भी मायानगरी से ही चलता है। विभाग अब इस बात की तहकीकात कर रहा है कि ये अवशेष आए कहां से ? क्या ये आसपास के जंगलों से लाए गए थे या इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट है?
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रिसॉर्ड मालिक पर कसेगा शिकंजा ?
एसडीओ आशीष खोपरागढ़े के मुताबिक, फिलहाल मैनेजर को घेरे में लिया गया है। पूछताछ में यह साफ होगा कि ये अवशेष कितने पुराने हैं। बड़ा सवाल तो यह है कि क्या चंद रुपयों और ‘वाइल्डलाइफ फील’ देने के चक्कर में बेजुबानों के अवशेषों का सौदा किया जा रहा था ? यदि जांच की आंच बढ़ी, तो रिसॉर्ट मालिक पर भी कानूनी शिकंजा कसना तय है। फिलहाल 35 हजार का यह ‘लग्जरी एक्सपीरियंस’ अब कोर्ट-कचहरी के चक्करों में बदलता नजर आ रहा है।

