आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की स्थापना अप्रैल 1990 के दौरान उसका संस्थापक सदस्य रहा आतंकी कमांडर कैसर अहमद मीर उर्फ मोहम्मद इकबाल की कल सोमवार (2 फरवरी, 2026) की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, हिजबुल मुजाहिदीन का ये कुख्यात और बर्बर कमांडर कैंसर से पीड़ित था और पिछले दो दशक से भारत से भाग कर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के तरलाई कलां इलाके में रह रहा था. मिली जानकारी के मुताबिक, कैसर अहमद मीर उर्फ मोहम्मद इकबाल 1990 से 2008 तक कश्मीर घाटी के एक्टिव था और पुलवामा, शोपियां और राजपुरा में हिजबुल मुजाहिद्दीन का टॉप कमांडर था. साथ ही, जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में भी कैसर अहमद मीर ने अहम भूमिका निभाई थी.
कैसर अहमद मीर उर्फ मोहम्मद इकबाल 1990 से 2008 तक कश्मीर घाटी के एक्टिव था और पुलवामा, शोपियां और राजपुरा में हिजबुल मुजाहिद्दीन का टॉप कमांडर था.
कुछ साल पहले कैसर अहमद मीर उर्फ मोहम्मद इकबाल पाकिस्तान भाग गया था और वहां पर इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के गढ़ी हबीबुल्लाह इलाके के गुलधेरी मोहल्ले में स्थित खालिद बिन वलीद कैंप में आतंकियों की ट्रेनिंग करवाने की कमान दी गई थी. जहां पर हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी, रियाज नाइकू, जाकिर मूसा समेत सैकड़ों आतंकियों की ट्रेनिंग इसी कैसर अहमद मीर उर्फ मोहम्मद इकबाल की देखरेख में हुई थी.
जम्मू कश्मीर से भी धारा 370 हटने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन के लिए आतंकियों की भर्ती मुश्किल हो गई, क्योंकि हिजबुल मुजाहिदीन के लिए सरकारी सिस्टम में बैठे चाहें सरकारी कर्मचारी हो या फिर शिक्षक या फिर हुर्रियत के बड़े नेता सबको सुरक्षा एजेंसियों ने जेल में डाल दिया. जिसके बाद इस समय हिजबुल मुजाहिद्दीन में पिछले 1 साल में एक भी जम्मू कश्मीर के रहने वाले नए आतंकी की भर्ती नहीं हो पाई है.
कैंप बंद होने के बाद एक समय पर जहां हिजबुल मुजाहिदीन के सालाना 100 से ज्यादा आतंकी तैयार होते थे, जिनमें से 40% आतंकियों को हिजबुल मुजाहिदीन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को पैसा लेकर देती थी, लेकिन कैंप बंद होने से हिजबुल की ओर से आतंकियों की ट्रेनिंग की रफ्तार धीरे-धीरे कम पड़ी और रावलपिंडी में हिजबुल कमांडर इम्तियाज आलम को अज्ञात बंदूकधारियों की ओर से मौत के घाट उतारने के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन का वित्तीय नेटवर्क पाकिस्तान के भीतर कमजोर हो गया.
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