अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर हमला किया. इसके बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को एक-एक करके निशाना बनाया. इस बीच UAE ने THAAD को एक्टिव कर दिया है, जिसने ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है. THAAD अमेरिकन एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है. जिसका पूरा नाम हैटर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेन्स. इसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जाता है.
अमेरिकी और इजराइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर संयुक्त हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलें दागीं. इनमें से कई मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात में सैन्य ठिकानों दागी गईं. हमलों के बीच THAAD चर्चा में है.
अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया में सबसे आगे है. यह मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सुनिश्चित करता है. उसके पास कई तरह की सुरक्षा प्रणालियाँ मौजूद हैं. इनमें पैट्रियट पीएसी-3, टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस, एजिस नौसेना सिस्टम आदि हैं. अमेरिका आने वाले दिनों में गोल्डन डोम विकसित करने की ओर अग्रसर है.
- पैट्रियट पीएसी-3: यह कम और मध्यम दूरी की मिसाइलों को गिराता है. इसकी रेंज लगभग 70170 किमी के बीच बताई जाती है. यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम है.
- THAAD की खासियत: यह ऊंचाई पर आती बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने के लिए बना है. यह लगभग 150 किमी ऊंचाई तक टारगेट को इंटरसेप्ट कर सकता है. यह टेक्नोलॉजी हिट टू किल फार्मूले पर काम करती है यानी सीधा टकराकर मिसाइल को टुकड़ों में तोड़ देता है.
- एजिस सिस्टम: यह जहाजों पर लगा नेटवर्क्ड एयर डिफेंस है. समुद्र से हवा में, मिसाइल और एयरक्राफ्ट दोनों को मार सकता है. अमेरिकी रडार नेटवर्क भी बहुत घना और लंबी दूरी तक फैला है.
रूस के पास एस 400 और एस 500 की रक्षा प्रणाली मौजूद है. ये दोनों जबरदस्त ताकत रखते हैं. ऐसे भी कहा जाता है कि दोनों ही रक्षा प्रणालियां रूसी सेना की जान हैं. रूस ने समय-समय पर इनका इस्तेमाल किया है और टारगेट को नष्ट करने में सक्षम रहे हैं. इसकी अधिकतम रेंज लगभग 400 किमी तक बताई जाती है. एक साथ दर्जनों टारगेट को ट्रैक कर सकता है. फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल, सब पर बराबर काम करता है. यह मोबाइल है. इसका मतलब यह हुआ कि कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है.
चीन के पास HQ 9, HQ 22 और उभरता HQ 29 है. चीन ने बीते दो दशकों में अपना एयर डिफेंस नेटवर्क बहुत तेजी से खड़ा किया है. उसका फोकस स्वदेशी सिस्टम और घना रडार ग्रिड है. उसके पास जो मुख्य सिस्टम उपलब्ध हैं उनमें एचक्यू-9, एचक्यू-22, एचक्यू 26 और एचक्यू 29 है.
इजराइल छोटा देश है, पर उसे सुरक्षा की जरूरत सबसे ज्यादा है. इसी वजह से उसने दुनिया की सबसे कॉम्पैक्ट और बुद्धिमान लेयर्ड शील्ड बनाई. इजरायल के पास जो एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध हैं उनमें आयरन डोम (Iron Dome), डेविड्स स्लिंग (Davids Sling) और एरो सिस्टम (Arrow 2, Arrow 3) हैं.
- आयरन डोम की खासियत: यह छोटी दूरी के रॉकेट, मोर्टार, ड्रोन को रोकने के लिए बनाया गया है. इसकी सफलता दर 80-90 फीसदी तक मानी जाती है. ये खुद तय करता है कि कौन सा रॉकेट आबादी वाले इलाके में गिरेगा. सिर्फ उन्हीं लक्ष्यों पर मिसाइल दागता है जिनसे असल में खतरा है. इसीलिए यह बेहद किफायती साबित होता है.
- डेविड्स स्लिंग भी कम नहीं: यह मध्यम दूरी की मिसाइलों के लिएबनाया गया है. इसकी रेंज 70 से 300 किमी है.
- एरो सिस्टम: यह लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को ऊंचाई पर मारने के लिए बना है. इसे अमेरिका की टेक्नोलॉजी और सपोर्ट भी मिला है.
भारत के पास रूस का एस 400 है तो आकाश और बराक 8 भी इसके साथी हैं. भारत ने एस-400 रूस से खरीदा है. स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम भी बहुत मजबूत है. भारत इजराइल का संयुक्त उत्पादन बराक 8 भी एक तगड़ा सुरक्षा कवच है. उम्मीद की जा रही है कि भारत भविष्य में और स्वदेशी लेयर तैयार करने को आगे बढ़ चुका है.
भारत के लिए एस-400 स्ट्रैटेजिक कवच है. इसे पाकिस्तान और चीन दोनों दिशा में तैनात करने की योजना है. बराक 8 नौसेना और जमीन दोनों प्लेटफॉर्म से मध्यम दूरी तक लक्ष्य गिरा सकता है. स्वदेशी आकाश लो टू मीडियम रेंज एयर डिफेंस के लिए है.
संक्षिप्त में यहीं तुलना की जा सकती है कि अमेरिका का एयर डिफेंस सितम सबसे लेयर्ड है. स्पेस, जमीन और समुद्र तीनों से कवरेज में सक्षम है. इस तरह कहा जा सकता है कि समग्र आर्किटेक्चर में अमेरिका सबसे आगे है.
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