Dharam Desk :- क्या आपके जीवन में बार-बार परेशानियां आ रही हैं, बनते हुए काम बिगड़ रहे हैं या घर में सुख-शांति की कमी महसूस होती है। अगर आपको लगता है कि कुंडली में पितृ दोष है, तो आने वाला पितृपक्ष आपके लिए पितरों के स्मरण और सेवा का खास समय हो सकता है। पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ यह अवधि समाप्त होगी। यानी इन दिनों में पितरों के लिए श्रद्धा और सेवा से जुड़े कई कार्य किए जा सकते हैं। श्राद्ध पक्ष के दौरान अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दिन यह उपाय किया जा सकता है।

पितृ दोष से राहत के लिए चावल-घी का उपाय
उपाय के लिए थोड़ी मात्रा में चावल लें और उन्हें अच्छी तरह उबालकर पका लें। ध्यान रखें कि ये चावल विशेष रूप से इस धार्मिक कार्य के लिए तैयार किए जाएं। इन्हें घर के नियमित भोजन से अलग रखना चाहिए।
चावल पक जाने के बाद इसमें दो चम्मच शुद्ध देसी घी डालें। इसके बाद स्वादानुसार बूरा, शक्कर या पिसी हुई शक्कर मिला लें। सभी सामग्रियों को अच्छे से मिलाकर एक समान मिश्रण तैयार कर लें।
अब इस सामग्री को कौओं और पक्षियों को खिलाएं। सनातन धर्म में कौओं को पितरों से संबंधित माना जाता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष और अन्य अवसरों पर उन्हें भोजन कराने की परंपरा है। यदि आसपास कौआ न मिले तो मिश्रण को उपयुक्त पक्षियों को भी खिलाया जा सकता है।
पक्षियों को भोजन देते समय उनकी सुरक्षा और उचित आहार का ध्यान रखें। किसी भी सेवा या दान का महत्व श्रद्धा, सद्भाव और अच्छे भाव से जुड़ा होता है।
इस कार्य को अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिदिन किया जा सकता है। घर की स्त्री या कोई भी सदस्य अपनी श्रद्धा से यह सेवा कर सकता है। इसके लिए घर की मुख्य महिला का ही इसे करना आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए।
पितरों का स्मरण अन्नदान और पक्षियों को भोजन कराने से मन को शांति मिलती है और पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त होता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों का स्मरण करते समय मन में श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखना विशेष माना जाता है।
अन्न का दान और जीव-जंतुओं को भोजन कराना सेवा का एक माध्यम है। इस दौरान किसी के प्रति द्वेष न रखते हुए परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों की आत्मिक शांति की कामना की जा सकती है।



