Dharm Desk :- शारदीय नवरात्र इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना की जाती है। नवरात्र के दौरान कई ऐसे विशेष मुहूर्त और योग आते हैं। जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बहुत बड़ा महत्व होता है। इन्हीं सभी मुहूर्तों में सबसे ताकतवर और शुभफल दाई समय महाअष्टमी और महानवमी की संधियों के बीच का काल माना जाता है। संधि पूजा महाष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और महानवमी तिथि के शुरुआत 24 मिनट के दौरान होती है। इस वर्ष यह विशेष संधि काल 19 अक्टूबर सोमवार को सुबह 10:27 से 11:15 मिनट के बीच का समय रहेगा। इस अवधि को बंगाली समाज में विशेष रूप से खास समय माना जाता है।
संधि काल का धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यता
प्राचीन धार्मिक गाथाओं के अनुसार अष्टमी तिथि के समापन और नवमी तिथि के आरंभ के बीच के ठीक 48 मिनट के समय को ‘संधि काल’ कहा जाता है।इसी विशेष और शक्तिशाली समय में देवी दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण करके महाभयंकर असुरों चण्ड और मुण्ड का वध किया था। यही कारण है कि इस अवधि को बहुत अधिक ऊर्जावान और चमत्कारी मानते है। संधि काल में की गई देवी दुर्गा की पूजा कभी निष्फल नहीं होती और साधक को उसकी साधना का जल्द से जल्द फल प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार इस बार 19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर महाअष्टमी तिथि समाप्त होकर महा नवमी तिथि आरंभ होगी। इस प्रकार संधि पूजा का मुख्य और सटीक समय सुबह 10 बजकर 27 मिनट से लेकर 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इन 48 मिनटों की समयावधि को ही साधना और विशेष अनुष्ठान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

पूजन विधि और मंत्र
इस संधि काल के दौरान विशेष अनुष्ठान और दीप प्रज्वलन किए जाते हैं। मंदिरों में एक सौ आठ दीप जलाए जाने की परंपरा है।जो नकारात्मक ऊर्जा का नाश कर सकारात्मकता का संचार करते है।इस संधि काल में मां की आराधना करना चाहते है। तो इन 48 मिनटों के दौरान देवी के सामने एक शुद्ध घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।पूजा करते समय माता को कमल अथवा गुड़हल के लाल फूल अर्पित करें तथा साथ ही एक लाल फल भी रखें।इसके बाद मां चामुंडा के इस मंत्र का एक 108 बार जाप करे।
ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
मंत्र जाप के बाद मन में देवी से प्रार्थना करें कि हे मां आपकी कृपा से हमारा पूरा परिवार सुरक्षित, स्वस्थ और हमेशा खुश रहे। मां चामुंडा अपने सच्चे भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करती हैं। इसलिए इस बहुत महत्वपूर्ण 48 मिनट के समय को व्यर्थ न जाने दें और सपरिवार देवी की आराधना में लीन रहें।

