Dharm Desk :- शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्तदेवी के मंदिरों में पहुंचकर सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। देवभूमि उत्तराखंड में मां कोटगाड़ी देवी का एक ऐसा धाम है। जहां भक्त केवल अपनी मनोकामनाएं ही नहीं, बल्कि अन्याय से जुड़ी फरियाद लेकर भी पहुंचते है । पिथौरागढ़ जिले के पांखू क्षेत्र में स्थित इस मंदिर को न्याय की देवी का दरबार कहा जाता है । स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जब कहीं से न्याय की उम्मीद नहीं बचती, तब मां कोटगाड़ी के सामने अपनी बात रखी जाती है। नवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर की मान्यताएं और यहां पूजा करने की परंपरा विशेष रूप से चर्चा में रहती हैं।
मां कोटगाड़ी को क्यों कहा जाता है न्याय की देवी
मां कोटगाड़ी को मां कोकिला देवी के नाम से भी जाना जाता है। भक्त उन्हें देवी दुर्गा का रूप मानकर पूजा करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, माता के दरबार में अन्याय से परेशान लोगों की फरियाद सुनी जाती है । यही वजह है कि इस मंदिर में लोग परिवार, जमीन और आपसी विवादों से जुड़ी परेशानियां लेकर पहुंचते है, जिन लोगों को लगता है कि उनकी बात कहीं नहीं सुनी जा रही, वे मां के सामने अपनी अर्जी लगाकर न्याय की प्रार्थना करते हैं।

सादे कागज पर लिखते फरियाद
मां कोटगाड़ी के मंदिर की एक खास परंपरा यहां अर्जी लगाने से जुड़ी है। अपनी परेशानी बताने के लिए भक्त सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखते हैं। उसे मंदिर में जमा करते हैं। कुछ लोग अपनी फरियाद डाक के माध्यम से भी भेजते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां के सामने सच्चे मन से रखी गई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती। मंदिर में आने वाले भक्त अपनी समस्याओं के समाधान और न्याय की उम्मीद लेकर देवी की आराधना करते हैं।
पांच पीढ़ियों पुराने अन्याय की भी लगाते हैं, गुहार
इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता यह है कि यहां पुरानी पीढ़ियों के अन्याय के लिए भी फरियाद लगाई जा सकती है। स्थानीय लोगों के बीच विश्वास है कि यदि किसी परिवार के साथ कई पीढ़ियों पहले अन्याय हुआ हो, तो उके लिए भी मां के दरबार में प्रार्थना की जा सकती है। इसी मान्यता के कारण मां कोटगाड़ी को न्याय की देवी के रूप में विशेष पहचान मिली है।
नवरात्रि में मां के दर्शन का विशेष महत्व
नवरात्रि में देवी दुर्गा की आराधना के लिए भक्त मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। मां कोटगाड़ी के दरबार में भी भक्त अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते हैं और देवी से परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। मंदिर में मां के दर्शन कर भक्त चुनरी और पूजा सामग्री अर्पित करते है स्थानीय परंपरा में चैत्र और शारदीय नवरात्रि की अष्टमी का विशेष महत्व बताया जाता है। इस दौरान मां के दर्शन और पूजा के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।

