गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में इस बार मेहमानों के बैठने की कुर्सियों को VVIP/VIP की जगह भारत की प्रमुख नदियों के नाम (जैसे गंगा, यमुना, कावेरी, ब्रह्यपुत्र) दिए गए हैं, ताकि आम नागरिक और VIP के बीच का अंतर कम हो और भारतीय संस्कृति व विरासत को बढ़ावा मिले, साथ ही बीटिंग रिट्रीट समारोह की गैलरी वाद्ययंत्रों के नाम पर रखी गई है, जो इस बार समानता और विरासत पर जोर देने का एक नया कदम है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से आम आदमी और वीआईपी के बीच अंतर कम होगा। भारतीय संस्कृति, विरासत और समानता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हर नागरिक खुद को बराबर महसूस कर सकेगा।
गणतंत्र दिवस समारोह में केंद्र सरकार सालों से चले आ रहे VIP कल्चर को खत्म करने जा रही है। परेड देखने के लिए आए मेहमानों की कुर्सियों पर अब VVIP, VIP और डिग्निटी नहीं लिखा होगा। इसकी जगह नदियों के नामों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए गैलरी का नाम संगीत वाद्ययंत्रों के नाम पर रखा है।
रिपब्लिक डे परेड के लिए चीफ गेस्ट का चुनाव भारत की डिप्लोमैटिक प्रायोरिटीज और बिजनेस रिलेशन के आधार पर तय किया जाता है। मेहमान का नाम तय करते समय यह देखा जाता है कि किस देश के साथ आने वाले समय में ट्रेड, डिफेंस और साइंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जा सकता है। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट, उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी ने दोनों नेताओं को समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है। ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे.
इस बार 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में नई परंपरा देखने को मिलेगी, जिसमें दर्शकों के बैठने की जगहों को थीम के हिसाब से बदला गया है। परेड के रास्ते में बनी बैठने की जगहों को पहली बार नंबरों से नहीं पहचाना जाएगा। इसके बजाय, लोगों के बैठने की जगह का नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर रखा गया है। 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो फर्स्ट चीफ गेस्ट बने थे। अब तक यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के लीडर्स को सबसे ज्यादा 5-5 बार चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया है।
पहली बार, भारतीय सेना की नई ‘भैरव बटालियन’ कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी और सुप्रीम कमांडर को सलामी देगी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कारगिल से इन नई लाइट कमांडो बटालियनों के गठन की घोषणा की थी।
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