अभय मिश्रा, मऊगंज। विकास के बड़े-बड़े दावों और डिजिटल इंडिया के शोर के बीच एक तस्वीर आपके कलेजे को चीर देगी। मऊगंज जिले के नईगढ़ी में एक महिला की मौत के बाद सिस्टम ने उसे दो गज का सम्मान तक नहीं दिया। पोस्टमार्टम के बाद जब एंबुलेंस नहीं मिली, तो बेबस परिजन अपनी ही मुखिया के शव ठेले पर लादकर ले गए।
ये पहिए सिर्फ एक ठेले के नहीं घूम रहे, बल्कि ये हमारे समाज और प्रशासन की संवेदनहीनता पर करारा तमाचा हैं। नईगढ़ी की सड़कों पर आज जो मंजर दिखा, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक तरफ सड़क हादसे में अपनी जान गंवा चुकी महिला का निर्जीव शरीर था और दूसरी तरफ अपनों की बेबस आंखें… जो सिस्टम से एक अदद ‘शव वाहन’ की भीख मांगती रहीं।
बताया जा रहा है कि मृतक महिला नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी थी। पोस्टमार्टम के बाद जब परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से शव को घर ले जाने के लिए वाहन मांगा, तो उन्हें मिला सिर्फ टका सा जवाब। न एंबुलेंस आई, न ही सरकारी तंत्र पसीजा। आखिरकार, फटेहाल और गरीब आदिवासी परिवार ने एक तीन पहिया ठेले का सहारा लिया और अपनी भावनाओं को उसी कचरे जैसे ठेले पर लादकर अंतिम विदाई के लिए निकल पड़े।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नईगढ़ी में ट्रैफिक व्यवस्था भगवान भरोसे है। आए दिन हादसे होते हैं, जिंदगियां खत्म होती हैं, लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। न समय पर इलाज मिलता है और न ही मौत के बाद सम्मान। नईगढ़ी की इन तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा या फिर हर बार की तरह मामला कागजों में दबा दिया जाएगा? पीड़ित परिवार को इंसाफ और सम्मान का इंतजार है।

