चुनाव आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद शनिवार को फाइनल वोटरलिस्ट जारी कर दी है। बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर मनोज कुमार अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि एसआईआर के बाद राज्य में अभी कुल वोटर्स की संख्या 7,04,59,284 है। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 60,06,675 वोटर्स के नाम पेंडिंग हैं। बंगाल के सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 58 लाख नाम छूट गए थे। असल में मरे हुए, ट्रांसफर हुए, नकली वोटर लिस्ट से छूट गए थे। इसके बाद एसआईआर में सुनवाई के बाद पता चला है कि अब तक 5 लाख नाम छूट गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि बाकी करीब 65 लाख नामों पर अभी ट्रायल चल रहा है।
चुनाव आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद फाइनल वोटरलिस्ट जारी कर दी है। इसमें करीब 65 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर मनोज कुमार अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य में अभी कुल वोटर्स की संख्या 7,04,59,284 है।
चुनाव आयोग की जारी सूची से पता चलता है कि नवंबर में प्रक्रिया शुरू होने के बाद से नदिया जिले में लगभग 2.71 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। जबकि बांकुड़ा में कुल 1.18 लाख नाम काटे गए हैं। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, उत्तरी कोलकाता क्षेत्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से लगभग 4.07 लाख नाम हटाए गए हैं।
उत्तरी कोलकाता क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और उन पर वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। इनमें से लगभग 3.90 लाख लोगों के नाम मसौदा चरण में ही हटा दिए गए और अंतिम सूची में 17,000 लोगों के नाम हटाए गए।
अधिकारी ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची में अब लगभग 29,15,000 नाम हैं, जो प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 1.18 लाख नामों की शुद्ध कटौती को दर्शाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश की सीमा से लगे नदिया जिले में लगभग 2.73 लाख नाम हटाए गए जिससे अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 41.45 लाख रह गई जबकि पिछले साल चार नवंबर को एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने पर यह संख्या 44.18 लाख थी। 16 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद यह आंकड़ा घटकर 42,02,261 हो गया था।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी बंगाल के अलीपुरद्वार में अंतिम मतदाता सूची में 11,96,651 नाम शामिल थे, जबकि जिले में कुल 1,02,835 नाम हटाए गए। कई जिलों में अपडेट सूचियों की प्रति सार्वजनिक रूप से लगा दी गई है।
दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं पर विचार किया गया, जिनमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं के संबंध में ‘तार्किक विसंगतियां’ पाई गईं और 31 लाख मतदाताओं की ‘मैपिंग’ (दस्तावेजों का मिलान) नहीं हुई थी। लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम अब भी जनगणना प्रपत्रों में ‘तार्किक विसंगतियों’ के आधार पर कानूनी कार्रवाई के अधीन हैं।
राज्य में एसआईआर 2002 के बाद से इस तरह का पहला राज्यव्यापी अभ्यास है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पिछले साल चार नवंबर को मतदाताओं के बीच जनगणना प्रपत्रों के वितरण के साथ शुरू हुई थी।
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