मिडिल ईस्ट में ईरान के अलावा लड़ाई का एक और मोर्चा खुलता नजर आ रहा है. दरअसल, सऊदी अरब ने पूरे मिडिल ईस्ट से संयुक्त अरब अमीरात को अलग-थलग करने का प्लान तैयार किया है. इसके लिए सऊदी मिडिल ईस्ट के मजबूत देशों को साथ रहा है. शुरुआत मिस्र और यमन के साथ समझौते से हुआ है. सऊदी मिस्र और यमन के साथ समझौता कर पूरे लाल सागर से यूएई के दखल को हटाना चाहता है.

वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक सऊदी अरब के निशाने पर यूएई के उन ठिकाने पर है, जो लाल सागर को सीधे कंट्रोल करता है. दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिका को भी टेंशन में डाल दिया है. क्योंकि दोनों ही देश अमेरिका का करीबी माना जाता है.

यूएई के इन ठिकानों पर सऊदी की नजर

सऊदी अरब की नजर संयुक्त अरब अमीरात के मयून, अब्द अल-कुरी और जुकर आइसलैंड पर है. इन तीनों ही जगहों को मिलिशिया के जरिए यूएई ने कंट्रोल कर रखा है. सऊदी की कोशिश इन जगहों से यूएई को बेदखल करना है. इसके लिए सऊदी ने मिस्र और यमन के साथ गठबंधन बनाने का फैसला किया है. सऊदी पूरे मिडिल ईस्ट में उन लोगों को समर्थन देगा, जो सत्ता में पहले से काबिज हैं और जिन्हें राजदार कहा जाता है. यूएई के लिए यह इसलिए भी झटका है, क्योंकि हाल ही में सऊदी की वजह से उसे हरदामौथ और सोमालिया से बाहर होना पड़ा था.

सऊदी मीडिया में UAE के खिलाफ अभियान

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सऊदी मीडिया ने तनाव बढ़ने के साथ ही यूएई के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है. उदाहरण के तौर पर सऊदी चैनल al-Ekhbariya ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि यूएई यमन में अलगाव वादियों को समर्थन करता है. वहां पर गुप्त जेलों का संचालन करता है. al-Ekhbariya का कहना है कि यह सऊदी की सुरक्षा के लिए खतरा है. इसी तरह सऊदी मीडिया ने यह भी आरोप लगाया है कि अबु धाबी की कोशिशों की वजह से ही एसटीसी के नेता अबु जुबैदी सोमालीलैंड भाग गया.

सऊदी और यूएई में तनाव कैसे और क्यों बढ़ा?

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में साल 2025 तक सब कुछ ठीक था, लेकिन साल 2025 के आखिर में यूएई समर्थित एसटीसी ने यमन के दक्षिणी इलाकों पर अकेले ही कब्जा करना शुरू कर दिया. सऊदी ने इसे विश्वासघात माना. इसके बाद सऊदी ने यूएई पर अटैक कर दिया. इसके अलावा सऊदी का कहना है कि यूएई पर्दे के पीछे से सोमालिया और सूडान में गृहयुद्ध भड़का रहा है. जानकार हालिया तनाव को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के महत्वकांक्षा से भी जोड़कर देख रहे हैं. एमबीएस साल 2030 तक सऊदी को मिडिल ईस्ट में सबसे पावरफुल देश बनाने की कवायद में जुटे हैं. इसके लिए वे लगातार दुनिया के देशों से डील कर रहे हैं.

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