दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। उत्तर बागरा के जंगलों से महज 50 मीटर की दूरी पर खनन माफियाओं ने कानून और प्रशासन की नाक के नीचे डंपरों से सैकड़ों टन लाल मिट्टी और मुरम उड़ा दी। करीब 3 एकड़ से अधिक जमीन पर 10-12 फीट गहरे गड्ढे कर तालाब बना दिए गए, लेकिन न तो माइनिंग अफसर को भनक लगी और न ही तहसील के अधिकारियों को। जब वन विभाग की जमीन से रास्ता खोदते हुए पोकलेन मशीन पकड़ी गई, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। वन विभाग ने पोकलेन मालिक जितेंद्र राव पर मामला दर्ज कर मशीन राजसात करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। डीएफओ गौरव शर्मा के मुताबिक जंगल की सीमा से 250 मीटर के दायरे में एनओसी अनिवार्य है, जो नहीं ली गई थी।

​अफसरों की नींद खुली, पर मगरमच्छ के डर से भागे

खबरों के बाद जागी राजस्व विभाग की टीम जब आरआई मोहनप्रसाद दुबे और पटवारी के साथ जांच करने पहुंची, तो वहां भरे पानी में ‘मगरमच्छ’ का ऐसा खौफ छाया कि सर्वे अधूरा छोड़कर पूरी टीम रफूचक्कर हो गई। अब आरआई साहब अंदाजे से खुदाई को 10-12 साल पुरानी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

​विपक्ष का हमला,सुखी लकड़ी वालों को पकड़ते हैं, डंपर नहीं दिखते?

कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पराज पटेल ने निशाना साधते हुए कहा कि यह उत्खनन इतना बड़ा है कि सैटेलाइट से साफ दिख रहा है। सुखी लकड़ी बीनने वाले गरीबों को पकड़ने वाला अमला हजारों डंपर मिट्टी ढोने पर मौन बैठा रहा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जब्त पोकलेन को बिना कड़ी कार्रवाई के छोड़ा गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। ​फिलहाल वन विभाग ने संयुक्त जांच के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा है, लेकिन सवाल वही है कि क्या मगरमच्छ के बहाने छूटी जांच कभी पूरी होगी या माफिया फिर बाजी मार जाएगा?

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