भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक है. लेकिन, इतना व्यापक व्यापार घाटा होने के बावजूद भारत के लिए यह फायदेमंद हैं. इसके पीछे दिल्ली का खेल है. भारत अब इंपोर्ट टू एक्सपोर्ट मॉडल पर चल रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्मार्ट फोन और दवा सेक्टर का एक्सपोर्ट है. ये दोनों इंडस्ट्री पूरी तरह चीनी आयात पर निर्भर हैं. वर्ष 2025 में भारत और चीन के बीच व्यापार 156 अरब डॉलर तक पहुंच गया. वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में भारत अमेरिका के बीच कुल व्यापार 132 बिलियन डॉलर का रहा. चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर को पार कर गया है. वहीं अमेरिका के साथ भारत का व्यापार हमेशा से फायदे में रहा है. इसे ट्रेड सरपल्स कहा जाता है. अमेरिका के साथ ट्रेड सरपल्स करीब 40 अरब डॉलर का है.

 इस वक्त भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की खूब चर्चा है. भारत के लिए चीन एक बहुत बड़ा ट्रेड पार्टनर है. अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. लेकिन, भारत का चीन और अमेरिका के साथ व्यापार का नेचर पूरी तरह अलग है.

भारत और चीन के व्यापार के नेचर को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि इतना अधिक व्यापार घाटा होने के बावजूद ड्रैगन से सामान आयात करना भारत की मजबूरी है. उसके यहां से होने वाले आयात से हम मोटी कमाई करते हैं. अगर आयात बंद हो जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

पहले भारतीय बाजार में सस्ते चीनी माल छाए रहते थे. इसका सबसे बड़ा उदाहरण खिलौना सेक्टर है. रिपोर्ट के मुताबिक आज की तारीख में चीन से जो चीजें आयात की जाती हैं उसमें से 80 फीसदी रॉ मैटेरियल होते हैं.

भारत और चीन के बीच मौजूदा व्यापार को एक्सपर्ट इंपोर्ट टू एक्सपोर्ट मॉडल बता रहे हैं. मौजूदा वक्त में भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट में चीन का अहम योगदान है. ये एक्सपोर्ट चीन से इंपोर्ट होने वाली चीजों पर आधारित हैं. वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात के मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया. लेकिन, इसमें सबसे अहम बात यह है कि भारत इन स्मार्टफोन और आईफोन्स को बनाने के लिए चीन से बड़ी मात्रा में डिस्प्ले स्क्रीन, बैटर और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जैसी चीजें आयात करता है. इस तरह भारतीय कंपनियां चीन से इन चीजों को आयात कर भारत में स्मार्टफोन बनाती हैं और उसे अमेरिकी बाजार में अच्छे खासे दाम पर बेचती हैं.

भारत को फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है. भारत सस्ते दामों पर जेनरिक दवाइयां अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के देशों में निर्यात करता है. लेकिन, सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि भारत इन दवाइयों जैसे पैरासिटामॉल या एंटीबायोटिक्स बनाने के लिए पूरी तरह चीनी कच्चे माल पर निर्भर है. इन दवाओं को बनाने के लिए बड़े पैमाने पर रॉ केमिकल की जरूरत पड़ती है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत से इस सेक्टर के लिए करीब 70 फीसदी रॉ मैटेरियल चीन से आयात करता है. ये रॉ मैटेरियल दुनिया के किसी भी अन्य बाजार से सस्ते हैं. अगर भारत चीन से इन चीजों का आयात रोक दे तो उसकी फार्मा इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित होगी.

एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से अक्तूबर 2025 के बीच भारत ने चीन 38 बिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का आयात किया. इसमें 8.6 बिलियन का मोबाइल कंपोनेंट, 6.2 अरब डॉलर का इंटेग्रेटेड सर्किट और लॉपटॉप पार्ट्स थे.

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