चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने 5 साल पुराने एक आपराधिक मामले में खुद को आरोपी सूची से बाहर करने (डिस्चार्ज) की मांग की है। चंडीगढ़ जिला अदालत में गुरुवार को इस पर अहम सुनवाई हुई।
मजीठिया ने दलील दी है कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस केस से मुक्त किया जाए।
यह विवाद साल 2021 का है, जब अकाली दल के नेताओं ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार और 1984 के दंगों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की थी। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़प हुई, बैरिकेड्स तोड़े गए और सरकारी आदेशों का उल्लंघन किया गया। चंडीगढ़ के सेक्टर-3 थाने में मजीठिया सहित कई नेताओं के खिलाफ हिंसा और सरकारी काम में बाधा डालने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
मजीठिया की दलील: जब साथी बरी, तो मैं क्यों नहीं?
मजीठिया के वकील राजेश कुमार ने अदालत में समानता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि इसी मामले के अन्य सह-आरोपी महेश इंदर ग्रेवाल और दलजीत सिंह चीमा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से पहले ही राहत मिल चुकी है और उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द की जा चुकी है।
वकील ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट की शिकायत पर सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती थी। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 के तहत पहले निजी शिकायत दर्ज होनी चाहिए थी। साथ ही, पुलिस के पास मजीठिया के खिलाफ न तो कोई गवाह है और न ही कोई पुख्ता सबूत।

अब सबकी नजरें 12 मार्च पर
अदालत ने मजीठिया की डिस्चार्ज एप्लिकेशन पर सुनवाई पूरी कर ली है और अब मामला फैसले की ओर बढ़ चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी, जिसमें यह तय होगा कि मजीठिया को इस केस से राहत मिलेगी या नहीं।
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