अमृतसर. शिरोमणि अकाली दल में पार्टी लाइन से हटकर बयान और वीडियो जारी करने पर सख्ती बढ़ गई है। पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर रविवार को कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भुंदर की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें कड़ा फैसला लिया गया।
बिक्रम मजीठिया समेत सभी बागी नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और मामला अनुशासन समिति को भेज दिया गया है। जल्द ही इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आंतरिक मतभेदों से बढ़ा संकट
हाल ही में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को बदलने के फैसले के कारण पार्टी में मतभेद बढ़ गए हैं। शुक्रवार को SGPC की अंतरिम समिति की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां प्रमुख नेताओं ने इसका विरोध किया।
कई नेताओं ने दिए इस्तीफे
जनवरी में सदस्यता अभियान शुरू होने से पहले ही कई जिला और प्रदेश स्तर के नेता अपनी नाराजगी जता चुके थे या फिर अपने पदों से इस्तीफा दे चुके थे। जत्थेदारों को हटाने का फैसला असंतोष का मुख्य कारण रहा है। पूर्व SGPC प्रमुख गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने भी इस निर्णय की आलोचना करते हुए संगठन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।

सुखबीर सिंह बादल के सामने बड़ी चुनौती
शिरोमणि कमेटी का नियंत्रण बनाए रखने के लिए सुखबीर सिंह बादल के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मौजूदा संकट के चलते हरजिंदर सिंह धामी के इस्तीफे के बाद SGPC प्रमुख का पद भी खाली है। 28 मार्च को अमृतसर में होने वाली SGPC की बजट बैठक अहम होगी, क्योंकि इसमें जत्थेदारों को हटाने और नए नियुक्ति के फैसलों पर अंतिम मुहर लग सकती है। वरिष्ठ अकाली नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने जत्थेदार को हटाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिससे पार्टी में गहरी दरार पड़ गई है और आंतरिक सत्ता संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं।
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