Dharm Desk – भगवान शिव को आशुतोष के नाम से जाना जाता है। जिसका अर्थ है जो बहुत जल्दी खुश होना। महादेव अपने भक्तों के केवल सच्चे भाव और जल के एक लोटे से भी तृप्त हो जाते हैं। जब भी इंसान का जीवन संकटों से घिर जाता है। जब चारों तरफ निराशा के बादल छा जाते हैं और मनुष्य को आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता तब भगवान शंकर की शरण ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।

जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जब मनुष्य जी तोड़ मेहनत करता है। लेकिन फिर भी उसे असफलता का ही सामना करना पड़ता है। व्यापार या नौकरी में तरक्की रुक जाती है आर्थिक तंगी पीछा नहीं छोड़ती और परिवार में कोई न कोई सदस्य लगातार बीमारियों से घिरा रहता है। ऐसी कठिन घड़ी में भोलेनाथ का आश्रय लेने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी दूर होने लगती हैं।

महादेव के अनेक नाम और स्वरूप हैं और प्रत्येक नाम का अपना एक विशेष महत्व और महिमा है। जब भक्त किसी विशेष संकट में होता है तो शंकर जी के विशिष्ट नाम का स्मरण करने से उसका सीधा प्रभाव जीवन पर पड़ता है।यदि कोई व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और अटूट विश्वास के साथ भोलेनाथ के गुप्त नाम का जाप करते हुए। उन्हें जल अर्पित करता है। तो उसके जीवन के बड़े से बड़े कष्ट भी चुटकियों में खत्म हो जाते हैं। यह उपाय बहुत सरल है। लेकिन इसका प्रभाव बहुत ही गहरा और फलदायी माना गया है। जो भी भक्त सच्चे हृदय से भोलेनाथ के इस गुप्त नाम का आश्रय लेता है उसके जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि का आगमन निश्चित रूप से होने लगता है।

शिव पूजन की सही विधि

पूजा विधि

जब जीवन में कोई काम न बन रहा हो धन की प्राप्ति न हो रही हो या बीमारियां खत्म न हो रही हों तो एक पात्र जल में थोड़ा सा चंदन मिलाकर उसमें चावल का एक दाना डालें और उसे शिवलिंग पर अर्पित करें। जल अर्पित करते समय भगवान शंकर के विशेष गुप्त नाम करुनेश्वर महादेव का नाम लें, ऐसा करने से 3 से 4 घंटे के भीतर ही समस्या से राहत मिलती हैं और आगे बढ़ने के अवसर मिलने लगते हैं।