जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले में ईसीएल की भूमिगत कोयला गैसीकरण परियोजना को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। नाला प्रखंड के कास्ता गांव में मीथेन गैस निकालने के लिए ट्रायल शुरू होते ही ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि गांव के चापाकलों और बोरिंग से अचानक अपने आप पानी निकलने लगा है। वहीं, कुछ कुओं का पानी गर्म होने की भी शिकायत सामने आई है। इस अप्रत्याशित घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल परियोजना का ट्रायल रुकवा दिया है।
चापाकल और बोरिंग से अपने आप निकलने लगा पानी
ग्रामीणों के मुताबिक, परियोजना के तहत ट्रायल शुरू होने के करीब दो दिन बाद गांव के कई चापाकलों और बोरिंग से बिना पंप चलाए पानी निकलने लगा। कुओं के पानी का गर्म होना भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों को आशंका है कि जमीन के नीचे गैस निकालने की प्रक्रिया के कारण भूगर्भीय स्थिति या जलस्तर में बदलाव हो रहा है। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने की दूसरी जगह बसाने की मांग
घटना से परेशान ग्रामीण प्लांट के समीप पहुंचे और समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि कंपनी के अधिकारी गांव पहुंचकर पानी निकलने के कारणों की जांच करें।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाती है तो प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह बसाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने जिला प्रशासन से भी मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
प्रशासन ने रुकवाया ट्रायल, होगी जांच
मामले पर जामताड़ा के अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार ने बताया कि कुओं का पानी गर्म होने और चापाकलों से अपने आप पानी निकलने की सूचना मिलने के बाद ईसीएल के ऑपरेशन मैनेजर से बात की गई है। फिलहाल ट्रायल रुकवा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि खनन और प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही दोबारा ऑपरेशन शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा। एसडीओ ने ग्रामीणों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात भी कही है।
40 साल तक मीथेन गैस निकालने की है योजना
दरअसल, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की पांडेश्वर शाखा की ओर से कास्ता कोयला खदान में भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG) की पायलट परियोजना संचालित की जा रही है।
ईसीएल और कनाडा की एर्गो एक्सर्जी टेक्नोलॉजीज इंक के सहयोग से विकसित इस परियोजना के तहत जमीन के नीचे मौजूद कोयले से मीथेन सहित अन्य उपयोगी गैसें निकालने की योजना है।
परियोजना प्रबंधक मुरारी गौड़ के अनुसार, यहां करीब 40 वर्षों तक मीथेन गैस निकालने की संभावना है। इसके बाद कोयले का खनन किया जाएगा।
रोजगार और विकास की भी उम्मीद
परियोजना के सफल होने से नाला प्रखंड सहित पूरे जामताड़ा जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही कंपनी के सीएसआर फंड से आसपास के गांवों में विकास कार्य कराए जाने की भी संभावना है।
2024 में शुरू हुई थी ड्रिलिंग
इस परियोजना के पहले चरण की शुरुआत 22 जून 2024 को बोरहोल ड्रिलिंग और कोर टेस्टिंग के साथ हुई थी। इसका उद्देश्य जमीन के नीचे मौजूद कोयले की तकनीकी उपयोगिता और गैसीकरण की संभावनाओं का आकलन करना था।
दिसंबर 2015 में कोयला मंत्रालय ने कोयला और लिग्नाइट वाले क्षेत्रों में भूमिगत कोयला गैसीकरण के लिए नीति ढांचे को मंजूरी दी थी। इसी के तहत कास्ता कोयला ब्लॉक का चयन किया गया।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैसीकरण के ट्रायल के बाद चापाकलों से पानी अपने आप निकलने और कुओं का पानी गर्म होने की वजह क्या है? इसका जवाब तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा। ग्रामीणों की सुरक्षा और पेयजल स्रोतों की स्थिति को लेकर अब कंपनी और जिला प्रशासन की जांच पर सबकी नजर है।

